अरावली क्षेत्र से टावरों का सामान भी समेटा, पहले सात टावरों पर चला था बुलडोजर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में अवैध रूप से स्थापित मोबाइल टावरों के खिलाफ वन विभाग की सख्ती का असर दिखने लगा है। जिन तीन मोबाइल टावरों को हटाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को अतिरिक्त समय दिया गया था, उन्हें कंपनियों ने स्वयं हटा लिया है। इतना ही नहीं, कंपनियां टावरों से जुड़ा पूरा उपकरण और अन्य सामान भी मौके से ले गई हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कंपनियों को स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर टावर नहीं हटाए गए तो विभाग स्वयं कार्रवाई करेगा। विभाग की सख्ती के बाद संबंधित कंपनियों ने तीनों टावरों को हटाकर स्थल खाली कर दिया।
नोटिस के बाद भी नहीं की थी कार्रवाई
वन विभाग के मुताबिक, अरावली वन क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर निजी टेलीकॉम कंपनियों ने बिना अनुमति 12 मोबाइल टावर स्थापित कर दिए थे। विभाग ने नवंबर माह में एक टावर हटाने के बाद शेष टावरों को हटाने के लिए संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर 10 दिन का समय दिया था। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कंपनियों ने टावर नहीं हटाए। कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर विभाग को सख्त कदम उठाने पड़े।
सात टावरों को ध्वस्त कर चुका है विभाग
बृहस्पतिवार को वन विभाग ने पुलिस बल की मौजूदगी में सात अवैध मोबाइल टावरों को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद शेष तीन टावरों को हटाने के लिए कंपनियों को अंतिम अवसर दिया गया था। अब इन तीनों टावरों को भी कंपनियों ने स्वयं हटा लिया है। हालांकि, दो टावरों पर न्यायालय से स्थगन आदेश मिला हुआ है, इसलिए फिलहाल उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
कार्रवाई के दौरान हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता जतिन बरवाला को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। मौके पर स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम मौजूद रही।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वन क्षेत्र में स्थापित अवैध मोबाइल टावरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। विभाग की सख्ती के बाद कंपनियों ने तीन टावर स्वयं हटा लिए हैं। न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त दो टावरों को छोड़कर सभी अवैध टावर हटा दिए गए हैं।-झलकार उयके, जिला वन अधिकारी।