फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव में लगे कई स्टॉल में वैज्ञानिकों ने बच्चों को खेल-खेल में भौतिकी और गणित की तालीम दी। विज्ञान मेले में करीब 100 से अधिक स्टॉलों पर वैज्ञानिक और विज्ञान के जानकार स्कूली विद्यार्थियों को माॅडलों के जरिए विज्ञान सिखाते दिखे। उन्होंने सिखाया कि विद्यार्थियों को सोचने के तरीकों को बदलना होगा तभी वह विज्ञान को जानेंगे और कुछ ईजाद कर सकेंगे।
कीलों पर नहीं फटे गुब्बारे से सिखाया घनत्व का नियम
उज्जैन मध्यप्रदेश से आए वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार ने मॉडल्स के जरिए विद्यार्थियों को गुब्बारे को कीलों पर रखकर उसपर दबाव डाला। उन्होंने भौतिक के घनत्व का नियम दिखलाया कि गुब्बारा नहीं फूटा। इसी तरह से उन्होंने स्ट्रा पाइप से अलग-अलग आवाजें निकालकर दिखाई। शिक्षक की नौकरी छोड़कर शैलेंद्र एक संस्थान खोलकर विद्यार्थियों को विज्ञान सिखाने निकले हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को रटने की नहीं समझने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उनके सिखाए हुए तीन बच्चों के अविष्कार राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार में चुने गए हैं और उनका पेटेंट कराया गया है। उनके साथ आए बीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थी लोकेश पाटीदार ने बिजली के पोल के लिए ऐसी डिवाइस तैयार की है जिससे करंट नहीं उतर सकता। यह डिवाइस 500 रुपये कीमत का है। इसी तरह उनके एक विद्यार्थी ने गर्मी में ठंडक और सर्दी में गर्मी दिलाने वाला कूलर बनाया है।
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खेल-खिलौने के जरिए त्रिवेंदम के डॉ जिजो बच्चों को सिखा रहे विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में त्रिवेंदम से आए वैज्ञानिक डॉ. जिजो राय कई खेल-खिलौने लाए हैं। वह कई तरह के छोटे-छोटे खिलौने के जरिए से विद्यार्थियों को भौतिकी और गणित के नियमों को सिखला रहे हैं। वह साधारण बैटरी और मोटर के जरिए पंखा चलाना समेत छोटे-छोटे खिलौनों से बच्चों को सिखा रहे हैं। श्रीचित्रा तिरुनाल आयुर्विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान से जुड़े डॉ. जिजो अपने शिक्षक से प्रेरित हैं।