अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जहरीली हवाओं से लोगों को कोई खास राहत नहीं मिल रही है। बुधवार को लगातार चौथे दिन फरीदाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का स्तर 500 दर्ज किया गया। जिससे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। अस्पतालों की ओपीडी में बच्चों की संख्या काफी बढ़ गई है। ऐसे में डॉक्टरों ने लोगों को बच्चों का खास ध्यान रखने की बात कही है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 389 दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग आठ गुना अधिक है। वहीं शाम ढलते ही स्मॉग ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इससे लोगों को काफी दिक्कत हुई।जिले में प्रदूषण का बढ़ा हुआ स्तर लोगों को परेशान कर रखा है। फिलहाल वायु गुणवत्ता सूचकांक में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। दिवाली से पहले बारिश होने से एक्यूआई थोड़ा कम हुआ था, लेकिन अब इसमें धीरे-धीरे फिर से वृद्धि होने लगी है। शनिवार को फरीदाबाद का एक्यूआई 168 दर्ज किया गया था, जो रविवार को बढ़कर 172 हो गया था। दिवाली की रात जमकर पटाखे चलने प्रदूषण स्तर में एकाएक वृद्धि हुई और सोमवार को एक्यूआई 370 तक पहुंच गया था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, मंगलवार के मुकाबले बुधवार को एक्यूआई में 5 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की। बुधवार को एक्यूआई 389 दर्ज किया गया। जबकि मंगलवार को एक्यूआई 384 दर्ज किया गया था। अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो सेक्टर-16ए क्षेत्र सबसे प्रदूषित रहा। यहां का एक्यूआई 410 दर्ज किया गया। वहीं, सेक्टर 11 क्षेत्र में 388, सेक्टर 30 क्षेत्र में 364, एनआईटी क्षेत्र में दर्ज किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी संदीप सिंह ने कहा कि प्रदूषण का स्तर फिलहाल बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ है। हमारी टीमें लगातार अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं।
प्रदूषण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर कर रहा असर
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका ने बताया कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जो रोग को और बढ़ा देती है। यही कारण है कि अस्पताल में ऐसे बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है। एक सप्ताह पहले तक जहां बाल रोग ओपीडी में 100 बच्चे आते थे, अब करीब 150 आ रहे हैं। बच्चों में खांसी, जुकाम, बुखार की समस्या सबसे अधिक देखने को मिल रही है। जिससे बच्चों की ओपीडी में भी बढ़ोतरी हुई है।
सांस व एलर्जी के मरीजों की बढ़ी परेशानी
ग्रेटर फरीदाबाद स्थित निजी अस्पताल के चेयरमैन डॉ. प्रबल रॉय ने बताया कि सांस, फेफड़े और एलर्जी के मरीजों को प्रदूषण के कारण नींद न आना, सिर दर्द, अवसाद, ब्लड प्रेशर का बढ़ना, दिमाग पर असर होना, चिड़चिड़ापन, हृदय और न्यूरो संबंधी समस्याएं बढ़ गई हैं। सांस के मरीजों को कई बार इन्हेलर लेने की जरूरत पड़ रही है। इसलिए प्रदूषण से बचाव के लिए घर से कम से कम बाहर निकलें। खुले में प्रदूषण का असर अधिक रहता है, जबकि घर के अंदर हवा की गुणवत्ता थोड़ी ठीक होती है। अगर बाहर निकल रहे हैं तो मास्क जरूर लगाएं।
शाम ढलते ही छाया स्मॉग
शहर में ठंड का असर बढ़ना शुरू हो गया है। अन्य दिनों की तरह बुधवार को भी सुबह हाईवे पर भारी स्मॉग देखने को मिला। शाम ढलते ही आसमान में फिर स्मॉग छा गया। इस कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।