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Faridabad News: गर्भवती की मौत के मामले में 15 दिन बाद भी नहीं किया बोर्ड का गठन

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-जांच के लिए बनाया जाना है, लापरवाही के कारण गर्भवती महिला की 29 अप्रैल को हुई थी मौत
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। गांव चांदपुर स्थित सहारा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉक्टरों व आशा कार्यकर्ता की लापरवाही के कारण 29 अप्रैल को डिलीवरी के दौरान गर्भवती महिला रेशमा की मौत हो गई थी। गर्भवती का पोस्टमार्टम दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में करवाया गया था। 15 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं आई है। दूसरी ओर सीएमओ की ओर से अभी तक जांच के लिए बोर्ड का गठन भी नहीं किया गया।

गांव अरुआ निवासी नितिन ने बताया कि पत्नी रेशमा गर्भवती थी। 28 अप्रैल की सुबह चार बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो उन्होंने गांव की आशा कार्यकर्ता जगवती को फोन करके बुलाया। वह उसे गांव कोराली स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर गई। जहां डॉक्टरों ने मौखिक तौर पर बीके अस्पताल जाने को कह दिया। परिजनों का आरोप है कि जगवती रेशमा को बीके अस्पताल ले जाने की बजाए अपनी मर्जी से गांव चांदपुर स्थित सहारा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल ले गई। जहां सुबह सात बजे अस्पताल में भर्ती करवाया।
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सुबह से शाम तक रेशमा से परिजन को मिलने नहीं दिया गया। बार-बार पूछने पर डॉक्टर ने उनको किसी प्रकार का कोई जवाब नहीं दिया। अचानक से शाम छह बजे उनको कोई सूचना दिए बिना अस्पताल की एंबुलेंस में गर्भवती को दूसरे अस्पताल में लेकर जाने लगे। उस दौरान बच्चे का सिर बाहर आ चुका था। उसके बाद उनको दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने बताया की रेशमा की मौत हो गई। थाना चांदपुर चौकी इंचार्ज ओम प्रकाश ने बताया कि महिला का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों की टीम से करवाया गया। विभाग की ओर से 15 दिनों बाद पोस्टमार्टम की रिपोर्ट मिलने को कहा था लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है, जिसकी वजह से आगे की कार्यवाही रुकी हुई है।
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अभी तक नहीं बना बोर्ड
इंचार्ज ओम प्रकाश ने बताया कि उनकी ओर से सीएमओ डॉ. विनय गुप्ता को भी पत्र लिखा गया था कि वह इस केस की जांच के लिए एक कमेटी का गठन करें। इसमें डॉक्टरों की ओर से गर्भवती महिला की मौत कैसे हुई इसकी जांच करें। साथ ही टीम अस्पताल में जाकर यह भी जांच करें कि अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार खोला गया है कि नहीं। वहीं, निजी अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टरों व कर्मचारियों के पास जो डिग्री है वह असली है या नहीं इसकी भी जांच हो। अभी तक सीएमओ की ओर से कोई कमेटी का गठन नहीं किया गया। इसी वजह से निजी अस्पताल की जांच भी नहीं हुई।
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पुलिस विभाग की ओर से नहीं हुई जांच
रेशमा के पति नितिन ने बताया कि अभी पुलिस और स्वास्थ्य की विभाग की ओर से कोई जांच की गई है। वह रोज पुलिस चौकी जाकर पूछताछ करते हैं। वहां से सिर्फ उनको आश्वासन ही मिलता है।
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