ब्रेस्ट कैंसर को एक वर्ष में किया पस्त, अब बनीं मिसाल
किसी ने जीने की इच्छाशक्ति से कैंसर को हराया, तो किसी की जंग अभी जारी
निभा रजक
फरीदाबाद। परिवार का साथ हो तो कैंसर जैसी बीमारी भी घुटने टेक देती है। शहर में भी ऐसे बहुत व्यक्ति हैं, जिनकी गंभीर बीमारियों से की गई जंग लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई। वहीं, कुछ ऐसे भी हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर और जागरूकता के अभाव में बीमारी का शिकार हो रहे लोगों का सहारा बन रहे हैं। यह न केवल लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करते हैं बल्कि इलाज के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ जांच शिविरों का भी आयोजन करते हैं।
एक साल में जीत ली जंग, परिवार का मिला था साथ
ओल्ड फरीदाबाद अहीर वाडा निवासी 48 वर्षीय सुनीता ने बताया कि साल 2019 में उन्हें पता चला कि वह ब्रेस्ट कैंसर की शिकार हो गई हैं। रिपोर्ट देखकर उनके हाथ कांपने और आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी। गंभीर बीमारी का नाम सुनकर वह बहुत डर गई थीं। घर आकर परिवार को बताया तो थोड़ी देर सन्नाटा पसर गया। फिर पति लक्ष्मण ने उन्हें हिम्मत दी और सुनीता का इलाज कराया। उन्होंने समय पर इलाज और ठीक प्रकार की देखभाल के दम कर कैंसर जैसी बीमारी को सिर्फ एक साल में पस्त कर दिया। आज वह खुशहाली से अपने परिवार के साथ रह रहीं हैं।
परिवार की ताकत से बढ़ी हिम्मत, चल रहा इलाज
ग्रेटर फरीदाबाद स्थित केएलजे सोसाइटी में रहने वाली 63 वर्षीय कृष्णा यादव ने बताया कि साल 2023 मेंं पता चला कि उन्हें चौथे स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर है। उन्होंने इतनी गंभीर बीमारी का नाम भी नहीं सुना था, इसलिए सुनकर वह बेहद डर गईं। लगा कि जैसे सबकुछ खत्म हो जाएगा। लेकिन 66 वर्षीय पति करमपाल यादव और बेटा नरवीर यादव ने उन्हें हिम्मत दी। बेटा बहू सहित पूरे परिवार ने उनकी देखभाल की। समय पर दवाइयां और जांच करवाई जाती हैं, जिससे कृष्णा यादव की तबीयत में अब सुधार है। उनका इलाज दिल्ली एम्स से चल रहा है। उन्होंने बताया कि परिवार का साथ हो तो बड़ी से बड़ी बीमारी हार मान लेती है।
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लोगों की जांच और इलाज में कर रहे मदद
आर्थिक रूप से कमजोर और जागरूकता के अभाव में अधिकांश महिलाएं बीमारी का शिकार हो रही हैं। ऐसे में लोगों को जागरूक करने के लिए रोटरी क्लब जुटा हुआ है। क्लब की ओर से समय-समय पर शहर के अलग-अलग हिस्सों में जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जाता है। रोटरी क्लब (लाइफलाइन) पदाधिकारी रमेश गुलिया ने बताया कि द कैंसर फाउंडेशन और एफआईए चेरीटेबल सोसाइटी की ओर से लगाए गए जागरूकता शिविर में कई मामले मिलते हैं। इन मरीजों को अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जाता है। अभी तक 2000 से ज्यादा महिलाओं की जांच हो चुकी है। इलाज के लिए महिलाओं को संस्था की ओर से दवाइयां दिलाने से लेकर आर्थिक मदद भी की जाती है।