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Faridabad News: पिछले सात साल के अटका सीही के हॉकी मैदान का एस्ट्रोटर्फ

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- हॉकी खिलाड़ियों का मनोबल हो रहा प्रभावित, सात साल पहले हुआ था शिलान्यास
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। सेक्टर-7 स्थित हॉकी मैदान पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने का सपना खिलाड़ियों के लिए अब भी अधूरा है। सात साल पहले बड़े जोर-शोर से परियोजना का शिलान्यास हुआ था। इसके बाद भी मैदान में टर्फ बिछाने की योजना महज फाइलों में ही उलझी हुई है। शिक्षा और खेल विभाग के बीच समन्वय की कमी और फंड जारी न होने के कारण यह मैदान खिलाड़ियों के लिए तैयार नहीं हो सका है। इससे न सिर्फ स्थानीय स्तर पर हॉकी खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, बल्कि शहर के खेल ढांचे के विकास पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बता दें कि एक समय सीही को हॉकी का गढ़ माना जाता था। शायद यही कारण था कि पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साल 2016 में मैदान में एस्ट्रोटर्फ लगाने की घोषणा की थी। इसके लिए खेल विभाग को 2019 तक का समय दिया गया था। इसके बाद 2017 में उद्योग मंत्री विपुल गोयल की ओर इसका शिलान्यास किया गया और निर्माण सामग्री भी पहुंचा दी गई। इसके बाद खेल विभाग ने एस्ट्रोटर्फ के लिए पूर्ण रूप से जगह नहीं होने की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी और एक मिनी स्टेडियम बनाने की सलाह दी गई। इसके बाद वर्ष 2022 में यह फाइल बंद होकर ठंडे बस्ते में चली गई। हालांकि इसके पश्चात इसी वर्ष मार्च-अप्रैल में शिक्षा निदेशालय के निर्देश के बाद दोबारा मैदान का मुआयना किया गया। इसमें टर्फ के लिए पर्याप्त जगह पाई गई। इसके बाद मैदान के लिए 7 करोड़ से ऊपर का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन अब तक कार्य शुरु नहीं हो सका है।
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जिला खेल शिक्षा अधिकारी हरवीर सिंह ने बताया कि करीब एक माह पहले उनकी तरफ से फाइल को उच्च निदेशक को भेजा जा चुका है। अब उनके फैसले के बाद आगे की प्रक्रिया का इंतजार है।

मयंक वर्मा नाम के एक खिलाड़ी ने बताया कि लंबे बहुत समय से हॉकी खेेल रहा हूं। सीही में एस्ट्रोटर्फ ना होने के चलते सेक्टर 12 के खेल परिसर जाना पड़ता है। खिलाड़ी कपिल शर्मा ने बताया कि सीही के हॉकी मैदान की हालत बहुत खराब है। इसी के चलते मैंने अब हॉकी खेलना बंद कर दिया है। बीच मैदान में कई गड्ढे हैं। घास भी बहुत बड़ी हो गई है, बहुत समय से टर्फ बनने की राह देखी पर मैदान की हालत और बदतर हो गई है।
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सागर ने बताया कि बारिश के समय तो मैदान की हालत बेहद ही खराब हो जाती है। मैदान एक जंगल के रूप में तब्दील हो चुका है। जगह-जगह पानी भरा है। बहुत सारी झाड़ियां उग आई हैं।
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