संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एक हादसे ने जिंदगी बदल दी, डॉक्टरों ने चलने में मुश्किल होने की बात कही तो भविष्य अंधकारमय लगने लगा। कभी जिंदगी व्यर्थ लगने लगी थी, लेकिन खेल ने जीने का नया मकसद दिया। यह कहानी है जिले के पैरा एथलीट प्रणव सूरमा की, जिन्होंने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। अब तक तीन एशियाई स्वर्ण पदक और पेरिस पैरालंपिक में रजत पदक जीत चुके प्रणव की निगाहें 2027 की विश्व चैंपियनशिप और 2028 के पैरालंपिक पर हैं।
सोमवार रात घर पहुंचने पर एशियाई पैरा खेलों के स्वर्ण पदक विजेता प्रणव का ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया। मंगलवार को बातचीत में उन्होंने अपने संघर्ष और सफलता के सफर को साझा किया। प्रणव ने बताया कि वर्ष 2011 में हुए हादसे के बाद उन्हें स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हो गई थी। डॉक्टरों ने कहा था कि उनके लिए दोबारा चलना मुश्किल होगा और उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ेगा। यह उनके जीवन का बेहद कठिन दौर था और ऐसा लगा की जीवन ही खत्म हो गया है। लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और आगे बढ़ने का रास्ता तलाशा। प्रणव ने बताया कि वर्ष 2017 में उन्हें पैरा खेलों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कोच नवल सिंह के मार्गदर्शन में प्रणव का आत्मविश्वास बढ़ा। प्रणव ने अपनी सफलता का श्रेय कोच के साथ पूरे परिवार और पिता संजीव सूरमा को दिया।