फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: कंक्रीट में फंसकर दम तोड़ रही अरावली, चार फीसदी वन क्षेत्र कम हुआ

विज्ञापन
विज्ञापन
नूंह में सबसे ज्यादा उजाड़े गए जंगल, फरीदाबाद और पलवल की स्थिति भी खराब
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। विकास की दौड़ और अरावली की पहाड़ियों पर बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप ने फरीदाबाद मंडल के पर्यावरण को बड़े संकट में डाल दिया है। भारतीय वन सर्वेक्षण की ताजा द्विवार्षिक रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद, पलवल और नूंह जिलों में कुल मिलाकर करीब चार फीसदी तक वन क्षेत्र कम हुआ है।

रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो फरीदाबाद जिले में कुल 78.43 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में से 1.08 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है। वर्तमान में यहां 25.98 वर्ग किलोमीटर मध्यम घना जंगल और 52.45 वर्ग किलोमीटर खुला जंगल बचा है। इसी तरह पलवल जिले में भी 0.21 वर्ग किलोमीटर हरियाली कम हुई है। सबसे भयावह स्थिति नूंह जिले की है जहां 108.96 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में से रिकॉर्ड 4.05 वर्ग किलोमीटर जंगल खत्म हो चुका है। जंगलों के इस तरह सिमटने का सीधा असर शहर की हवा और सेहत पर पड़ना तय है।
विज्ञापन


पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार वन क्षेत्र घटने का मुख्य कारण अरावली के जंगलों में चोरी-छिपे हो रहे अवैध निर्माण और फार्म हाउस हैं। हालांकि प्रशासन समय-समय पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करता है लेकिन भू-माफियाओं की सक्रियता के कारण पहाड़ों पर कंक्रीट का जाल फैलता जा रहा है। करीब तीन दशक पहले तक जो अरावली फरीदाबाद के निवासियों के लिए ऑक्सीजन का मुख्य केंद्र थी अब वहां पेड़ों की जगह ऊंची दीवारें खड़ी हो रही हैं।
विज्ञापन


पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि वन क्षेत्र इसी तरह घटता रहा तो न केवल तापमान में बेतहाशा वृद्धि होगी बल्कि जैव विविधता और भू-जल स्तर पर भी इसके विनाशकारी परिणाम देखने को मिलेंगे। प्रशासन को अब कागजी पौधरोपण से आगे बढ़कर अवैध निर्माणों पर कड़ा प्रहार करना होगा और जन जागरूकता के माध्यम से बचे हुए जंगलों को सुरक्षित करना होगा। अधिकारियों को इस दिशा में सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि फरीदाबाद मंडल के फेफड़ों को बचाया जा सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें