अफगान मूल की एमबीबीएस डॉक्टर मुनीरा कुरैशी और डॉ निति नेगी
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अफगान मूल की 27 वर्षीय एमबीबीएस डॉक्टर मुनीरा कुरैशी अपने इलाज के लिए फरीदाबाद आई थीं। वह अब अपने ही घर जाने के नाम पर खौफजद़ा है। वह सोमवार को वतन वापसी के लिए तैयार थीं लेकिन एक रात पहले रविवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान ने कब्जा कर लिया।
घरवालों ने बेटी से फोन कर कहा, चाहे देश की सीमा पर रहना पड़े लेकिन वापस घर मत आना। यहां हालात बहुत खराब हैं। घरवालों ने उन्हें बताया कि लोग घरों में कैद हैं। तुम हमारे लिए दुआ करो। घरवालों से हुई बातचीत को बताते हुए डॉक्टर की आंखें नम थीं। हाथ कांप रहे थे। वह बस ऊपर वाले से महफूज भविष्य की दुआएं करती हैं, यह भी नियति को मंजूर न हुआ। वह दूसरे देश में हैं लेकिन तालिबान का डर है।
मुनीरा खुद दिल की मरीज हैं। इलाज के लिए 15 दिन पहले फरीदाबाद आईं थीं। यहां के मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट में उनका इलाज जारी है। अब 12 दिन बाद वीजा मान्यता खत्म हो जाएगी। इस बीच उनके देश में आतंकी संगठन का कब्जा उन्हें सोने नहीं दे रहा। कार्डिक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. निधि नेगी बताती हैं कि वह अपनी मरीज के लिए चिंतित हैं।
डॉक्टर मुनीरा के दिल की धड़कने सामान्य नहीं हैं। परेशानी इस बात की है कि चिंता और भावनाओं के हावी होने पर उनकी समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में घर और पूरे देश पर आतंकी संगठन का कब्जा परेशानी को दोगुना कर देते हैं।