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अफगानिस्तान संकट: ‘चाहे सीमा पर रहना पड़े, यहां मत लौटना’, घरवालों ने बेटी से फोन कर बताई आपबीती

Wed, 18 Aug 2021 11:07 AM IST
शाहरुख खान मूर्ति दलाल, अमर उजाला, फरीदाबाद

सार

घरवालों ने बेटी से फोन कर कहा, चाहे देश की सीमा पर रहना पड़े लेकिन वापस घर मत आना। यहां हालात बहुत खराब हैं। घरवालों ने उन्हें बताया कि लोग घरों में कैद हैं। तुम हमारे लिए दुआ करो। घरवालों से हुई बातचीत को बताते हुए डॉक्टर की आंखें नम थीं।
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अफगान मूल की एमबीबीएस डॉक्टर मुनीरा कुरैशी और डॉ निति नेगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अफगान मूल की 27 वर्षीय एमबीबीएस डॉक्टर मुनीरा कुरैशी अपने इलाज के लिए फरीदाबाद आई थीं। वह अब अपने ही घर जाने के नाम पर खौफजद़ा है। वह सोमवार को वतन वापसी के लिए तैयार थीं लेकिन एक रात पहले रविवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान ने कब्जा कर लिया। 
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घरवालों ने बेटी से फोन कर कहा, चाहे देश की सीमा पर रहना पड़े लेकिन वापस घर मत आना। यहां हालात बहुत खराब हैं। घरवालों ने उन्हें बताया कि लोग घरों में कैद हैं। तुम हमारे लिए दुआ करो। घरवालों से हुई बातचीत को बताते हुए डॉक्टर की आंखें नम थीं। हाथ कांप रहे थे। वह बस ऊपर वाले से महफूज भविष्य की दुआएं करती हैं, यह भी नियति को मंजूर न हुआ। वह दूसरे देश में हैं लेकिन तालिबान का डर है।

मुनीरा खुद दिल की मरीज हैं। इलाज के लिए 15 दिन पहले फरीदाबाद आईं थीं। यहां के मेट्रो हार्ट इंस्टीट्यूट में उनका इलाज जारी है। अब 12 दिन बाद वीजा मान्यता खत्म हो जाएगी। इस बीच उनके देश में आतंकी संगठन का कब्जा उन्हें सोने नहीं दे रहा। कार्डिक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. निधि नेगी बताती हैं कि वह अपनी मरीज के लिए चिंतित हैं।
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डॉक्टर मुनीरा के दिल की धड़कने सामान्य नहीं हैं। परेशानी इस बात की है कि चिंता और भावनाओं के हावी होने पर उनकी समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में घर और पूरे देश पर आतंकी संगठन का कब्जा परेशानी को दोगुना कर देते हैं।
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डॉक्टर भाई की वर्दी उतरवाकर भगाया, हेड देश छोड़कर भागे

मुनीरा बताती हैं कि रविवार रात भाई का फोन आया। वह भी मुनीरा की तरह डॉक्टर है। भाई ने कहा कि रविवार को उनके संस्थान हेड ने कहा वर्दी उतारो। घर जाओ। अब काम पर वापस मत आना। अब तुम किसी संस्थान के लिए काम नहीं करते। यहां तालिबान ने कब्जा कर लिया है। इसलिए सभी कर्मचारियों का डेटाबेस रिकॉर्ड डिलीट कर दिया गया है। ऐसा कह कर संस्थान हेड उसी समय देश छोड़कर भाग गए। वह एक सरकारी संस्थान में कार्यरत थे।

‘वी-विल नॉट फॉरगिव यू बाइडन’
बीते तीन साल से सरकारी डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रहीं मुनीरा बीते दो दिन से सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठा रही हैं। मुनीरा (27) अन्य अफगानियों के लिए लगातार आवाज उठा रही हैं। अफगानी लोगों की आवाज बनकर ‘वी-विल नॉट फॉरगिव यू बाइडन’ ट्रेंड में है।

मुनीरा जैसे अन्य अफगानिस्तान मूल के लोग तालिबानी कब्जे के लिए अमेरिका को दोषी मानते हैं। बतौर सरकारी कर्मचारी उन्हें एक महीने के लिए डिफेंस ट्रेनिंग दी गई थी। प्रशिक्षण अफगानी और अमेरिकी सेनाओं से मिला। अफगान में अंदरखाने लोग चर्चा कर रहे हैं कि देश की सेना ने अमेरिका के इशारे पर हथियार डाले हैं।

भारत सरकार से मदद की गुहार
अफगान मूल की बिटिया का कहना है कि वह हर साल भारत आती है। भारत की सरकार और लोग उसे पसंद हैं। उसके देश में भी लोग भारत की तारीफ करते हैं। अब उन्हें पड़ोसी मुल्क के नाते मदद चाहिए। बुरे हालातों में भारत में फंसे अफगानी मूल के लोगों को मदद चाहिए। अन्य देश तालिबानी आतंक को रोकने के लिए एकजुट हों। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मदद की गुहार लगाएं, सभी देश एकजुट होकर अफगानियों की मदद करें।
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