बढ़ते डॉग बाइट मामलों के बीच निगम ने खुद संभाली कमान
2 से 5 एकड़ जमीन पर बनेगा आधुनिक शेल्टर, रहने, खाने और इलाज की पूरी व्यवस्था
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। शहर में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों के हमलों के मामलों के बीच नगर निगम ने बड़ा निर्णय लेते हुए 5 हजार कुत्तों की क्षमता वाले आधुनिक शेल्टर हाउस के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले यह काम निजी एजेंसी के माध्यम से दो अलग-अलग निविदाओं के जरिए करवाने की योजना थी लेकिन मामले की गंभीरता और लोगों की बढ़ती चिंता को देखते हुए अब निगम ने खुद एस्टीमेट तैयार करने का फैसला लिया है। निगम आयुक्त के निर्देश पर इंजीनियरिंग विंग ने इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया आरंभ कर दी है।
जिले में बीते तीन वर्षों के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को साफ दर्शाते हैं। वर्ष 2023 में 21,600 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए, 2024 में यह संख्या बढ़कर 23,215 तक पहुंच गई जबकि 2025 में अब तक 28,478 लोग सिविल अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवा चुके हैं। ये केवल वे मामले हैं जिन्होंने सरकारी अस्पताल में उपचार लिया। निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में उपचार कराने वालों का आंकड़ा इससे अलग है जिससे वास्तविक संख्या और अधिक होने का अनुमान है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डॉग बाइट के मामलों में लगभग 20 से 25 प्रतिशत पीड़ित बच्चे और बुजुर्ग होते हैं। शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों, बाजारों, औद्योगिक इलाकों और नई विकसित कॉलोनियों में आवारा कुत्तों के झुंड अक्सर देखे जा रहे हैं। स्थानीय निवासी कई बार निगम कार्यालय और हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा चुके हैं।
2 से 5 एकड़ में बनेगा आधुनिक शेल्टर
निगम की योजना के अनुसार शेल्टर हाउस 2 से 5 एकड़ के बीच चयनित भूमि पर बनाया जाएगा। स्थान चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और भूमि चिन्हित होते ही निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। इंजीनियरिंग विंग प्रारंभिक अनुमान के आधार पर परियोजना की लागत 15 से 25 करोड़ रुपये के बीच मान रही है हालांकि अंतिम एस्टीमेट तैयार होने के बाद ही स्पष्ट राशि सामने आएगी। शेल्टर में एक साथ 5 हजार कुत्तों को रखने की व्यवस्था होगी। इसमें अलग-अलग सेक्शन बनाए जाएंगे बीमार कुत्तों के लिए आइसोलेशन वार्ड, नवजात पिल्लों के लिए अलग इकाई, नसबंदी के बाद रिकवरी जोन और सामान्य आवास क्षेत्र।
रहने, खाने और इलाज की पूरी व्यवस्था
प्रस्तावित शेल्टर केवल अस्थायी पकड़-छोड़ केंद्र नहीं होगा बल्कि यहां व्यवस्थित देखभाल की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक कुत्ते के लिए पर्याप्त स्थान, स्वच्छ पेयजल, नियमित भोजन, पशु चिकित्सकों की टीम, टीकाकरण और नसबंदी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा रेबीज नियंत्रण और जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को भी शेल्टर से जोड़ा जाएगा। पशुपालन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुत्तों को पकड़कर दूसरे क्षेत्रों में छोड़ना स्थायी समाधान नहीं है। नसबंदी और टीकाकरण के व्यवस्थित कार्यक्रम से ही डॉग बाइट मामलों में कमी लाई जा सकती है। नगर निगम इसी मॉडल को अपनाने की तैयारी में है।
निजी एजेंसी से हटकर खुद संभाली जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार पहले इस परियोजना के लिए दो अलग-अलग निविदाएं जारी करने की तैयारी थी लेकिन लगातार बढ़ती शिकायतों और संवेदनशीलता को देखते हुए निगम प्रशासन ने निर्णय लिया कि एस्टीमेट और प्रारंभिक ढांचा स्वयं तैयार किया जाए ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बनी रहे।
जमीन चयन के बाद शुरू होगा काम
निगम प्रशासन का लक्ष्य है कि भूमि चयन और एस्टीमेट प्रक्रिया पूरी होने के बाद टेंडर जारी कर निर्माण कार्य वर्ष के भीतर शुरू कर दिया जाए। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो आने वाले दो से तीन वर्षों में डॉग बाइट मामलों में कमी लाने का दावा किया जा रहा है। शहर में लंबे समय से उठ रही मांग के बीच यह परियोजना अब ठोस आकार लेती दिख रही है।
निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा के निर्देश पर इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है, जल्द इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। लावारिस कुत्तों का टीकाकरण व नसबंदी का काम अभी भी तेजी से किया जा रहा है।- नीतीश परवाल, एमओएच नगर निगम