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Faridabad News: रामलीला के मंच पर दिखेगी संस्कृति की झलक, युवाओं को जोड़ने की पहल

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जिले की छह रामलीला समितियों ने साझा किए आयोजन के अनुभव, कलाकारों की कमी से लेकर संसाधनों तक की समस्याएं भी सामने आईं
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। भागदौड़ भरी जिंदगी और पढ़ाई-नौकरी के दबाव के बीच युवा अपनी संस्कृति और परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में नवरात्र के दौरान होने वाली रामलीलाएं नई पीढ़ी को रामायण और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का काम कर रही हैं। रामलीला के मंच पर जहां भगवान राम के आदर्श और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, वहीं छोटे कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिलता है। इसी उद्देश्य से एनआईटी-1बी ब्लॉक स्थित पावन सिद्धपीठ हनुमान मंदिर में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जिले की छह रामलीला समितियों के निर्देशक, पदाधिकारी और कलाकार शामिल हुए। सभी ने रामलीला के आयोजन, कलाकारों की उपलब्धता, युवाओं की भागीदारी और आर्थिक चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए।
सेक्टर-37 की श्री रामलीला सेवा समिति के निर्देशक दीपक, नरेंद्र , वसु शर्मा और राजीव ठाकुर ने बताया कि हर साल 30 फीट का मंच तैयार किया जाता है। इस बार मंच को बढ़ाकर 60 फीट किया जाएगा। प्रतिदिन 500 से अधिक दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि सरदार बलबीर सिंह हर साल की तरह आर्थिक सहयोग देते हैं। इसके अलावा महिला कलाकार नहीं मिलने के कारण इस बार भी मेकअप आर्टिस्ट जीपी सिंह सीता का किरदार निभाएंगे।
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चाचा चौक की स्वर्ण कला रामलीला कमेटी के निर्देशक अमित शर्मा ने बताया कि पहले वह दूसरी रामलीला समितियों के साथ काम करते थे। इस बार पहली बार अपनी रामलीला शुरू कर रहे हैं। इसमें अधिकतर युवा कलाकार हैं। सीता का किरदार निभाने वाली कलाकार सरकारी अस्पताल में लैब टेक्नीशियन हैं, जबकि मेघनाद का किरदार निभाने वाला कलाकार फाइनल ईयर का विद्यार्थी है। आयोजन स्थल नहीं मिलने के कारण शुरुआत में परेशानी हुई, लेकिन अब स्थल मिल गया है। रामलीला छह अक्तूबर से शुरू होगी।



वृंदावन से आएंगे सेक्टर-3 रामलीला के कलाकार
कमेटी पदाधिकारी शिव सिंह मलिक, नरेश कुमार और श्री भगवान ने बताया कि हर साल युवाओं को रामलीला से जोड़ने का प्रयास किया जाता है, लेकिन पढ़ाई और नौकरी के कारण युवा पर्याप्त समय नहीं दे पाते। यहीं कारण है कि इस बार भी वृंदावन से कलाकार बुलाए गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके गांव सीही में कई अच्छे कलाकार हैं, लेकिन नौकरी और पढ़ाई के कारण वे रामलीला में हिस्सा नहीं ले पाते।



एनआईटी-1 में नए सिरे से करेंगे शुरू रामलीला
एनआईटी-1 विजय रामलीला की ओर से दिनेश अरोड़ा और मनीष ने बताया कि पिछले साल रामलीला के दौरान आग लगने से पूरा सामान जल गया था। इस बार दोबारा आयोजन शुरू करने में आर्थिक परेशानी आ रही है। समिति के पदाधिकारी अलग-अलग जगह जाकर सहयोग जुटा रहे हैं। उनका कहना है कि पहले जैसी भव्य रामलीला संभव नहीं होगी, लेकिन उपलब्ध संसाधनों में आयोजन करने का प्रयास किया जाएगा।


65 साल के बुजुर्ग भी ले रहे हैं भाग
पाली चौक स्थित कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल रामलीला समिति की ओर से हर साल युवाओं को रामलीला में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस बार भी युवा कलाकारों की संख्या अधिक रहेगी। समिति के अनुसार 10 से 65 वर्ष तक की उम्र के कलाकार अलग-अलग किरदार निभाएंगे। खुद का आयोजन स्थल होने से व्यवस्थाएं करने में सुविधा रहती है। यहां करीब 600 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है।



सीता स्वयंवर रहेगा विशेष
नंबर-2 जागृति रामलीला कमेटी प्रधान अनिल गांधी ने बताया कि इस बार रामलीला में सीता स्वयंवर का आयोजन विशेष तरीके से किया जाएगा। नौ अक्तूबर को होने वाला सीता स्वयंवर बनवारी भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा। यह क्षेत्र की अपनी बोली और संस्कृति को मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास होगा। कार्यक्रम में सैकड़ों दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।



लोगों से बातचीत
हर साल रामलीला के माध्यम से संस्कृति को जीवित रखने के साथ नई प्रतिभाओं को मंच देने का प्रयास करते हैं। - अनिल गांधी, जागृति रामलीला कमेटी

आज के समय में युवा कलाकारों के लिए समय निकालना चुनौती बना हुआ है। युवाओं को आगे आना चाहिए। - अमित, स्वर्ण कला रामलीला

समितियों को महिला कलाकार नहीं मिलने के कारण पुरुष कलाकारों से महिला पात्र करवाने पड़ते हैं। - दीपक , श्री रामलीला सेवा समिति सेक्टर-37

युवाओं के पास समय नहीं होने की वजह से उनकी कमेटी वृंदावन से कलाकार बुलाकर रामलीला का आयोजन करती है। - शिव सिंह मलिक, रामलीला कमेटी, सेक्टर-3

आर्थिक सहयोग की कमी और आयोजन स्थल की समस्या भी समितियों के सामने है। इसके बावजूद आयोजक रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं।- दिनेश अरोड़ा, विजय रामलीला कमेटी
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संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए बुजुर्ग भी उनकी रामलीला में भाग ले रहे हैं। इससे युवा प्रेरित होंगे। - दिगंबर सिंह बिष्ट, कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल
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