-पैसे ऐंठने के लिए खुद को बताया था रेलवे का उच्च अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला न्यायालय के मुंशी धर्मवीर से बेटे को रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर 3.81 लाख की ठगी की गई। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पीड़ित ने प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद सेंट्रल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पीड़ित धर्मवीर के अनुसार ठगी की शुरुआत 2022 में हुई। उस समय कृष्ण प्रसाद नामक व्यक्ति पर चोरी का एक मामला चल रहा था जिसकी जमानत धर्मवीर के माध्यम से हुई थी। इसी दौरान कृष्ण प्रसाद और उसकी बुआ मुन्नी देवी ने खुद को रेलवे का उच्च अधिकारी बताकर धर्मवीर का विश्वास जीता। आरोपियों ने फर्जी आई-कार्ड दिखाकर दावा किया कि वे कोटे के माध्यम से धर्मवीर के बेटे अभिषेक की सरकारी नौकरी रेलवे में लगवा सकते हैं।
नौकरी के नाम पर आरोपियों ने पांच लाख रुपये की मांग की थी। पीड़ित ने अब तक 3.81 लाख रुपये का भुगतान किया। पीड़ित ने चार दिसंबर 2023 को कोर्ट परिसर में ही 1.5 लाख रुपये दिए थे। इसके बाद जनवरी 2024 से अप्रैल 2024 के बीच कुल 12 बार में 2.31 रुपये यूपीआई के जरिये भेजे। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने जॉइनिंग लेटर देने का झांसा दिया और बाद में फोन उठाना बंद कर दिया।
पीड़ित ने न्याय के लिए 21 अक्तूबर 2024 से लेकर जुलाई 2025 तक एसएचओ सेंट्रल, पुलिस कमिश्नर, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तक कुल नौ बार लिखित शिकायतें और स्पीड पोस्ट भेजे। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने आरटीआई लगाई। आरटीआई के जवाब में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पुलिस ने न तो दोषियों को नोटिस दिया और न ही उनके बयान दर्ज किए। पुलिस ने बिना किसी जांच के ही मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया था।
पीड़ित ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में न्याय की गुहार लगाई। आयोग के सख्त रुख और डीसीपी सेंट्रल फरीदाबाद के आदेश के बाद आरोपियों मुन्नी देवी और कृष्ण प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने फाइल को आगामी तफ्तीश के लिए पुलिस चौकी सेक्टर-15 फरीदाबाद भेज दिया है।