-मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की कार्रवाई, राजनीति और उत्पीड़न के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
पिनगवां । कस्बे की वर्तमान महिला सरपंच ललिता, उनके पति मनोज कुमार तथा ससुर गिरराज प्रसाद के खिलाफ थाना पिनगवां, जिला नूंह में गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला मुख्यमंत्री उड़नदस्ता द्वारा की गई जांच के आधार पर दर्ज हुआ है। शिकायत सोनू, महाबीर और प्रवीण कुमार, निवासी वार्ड नंबर 15 पिनगवां द्वारा दी गई थी।
जांच में आरोप सामने आए कि मनरेगा योजना के तहत फर्जी जॉब कार्ड बनाकर बिना मजदूरी कराए मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई और इस प्रक्रिया में 23,622 रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट के अनुसार खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी पिनगवां द्वारा कई बार पत्राचार किए जाने के बावजूद सरपंच और उनके प्रतिनिधियों ने गांव के विकास कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया और न ही जांच प्रक्रिया में सहयोग किया। इसके अलावा पंचायत क्षेत्र में बने ब्लॉक टाइल रास्तों से उखाड़ी गई पुरानी टाइलों को सरपंच प्रतिनिधियों द्वारा निजी मकान में रखने, पंचायत भवन में अवैध रूप से पार्किंग चलाने तथा पंचायत के ओपन जिम को निजी उपयोग में लेने जैसे आरोप भी जांच में सामने आए हैं।
इन सभी तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। मामला सामने आने के बाद पिनगवां कस्बे में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सरपंच पक्ष और कस्बे के कुछ लोगों का कहना है कि दलित समाज से जुड़ी महिला सरपंच को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि पिनगवां में पहले भी दलित वर्ग के सरपंचों को शिकायतों और मुकदमों में उलझाया गया, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते रहे हैं। सरपंच ललिता के समर्थकों का कहना है कि वह इस समय गर्भवती हैं और डॉक्टरों की सलाह पर पूर्ण आराम कर रही हैं। स्वास्थ्य कारणों से वह जांच समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकी, लेकिन उनकी अनुपस्थिति को गलत तरीके से पेश कर कार्रवाई की गई। वहीं सरपंच प्रतिनिधि मनोज तंवर ने आरोपों को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए कहा कि उन्होंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया और जल्द ही सभी आरोप निराधार साबित होंगे।