अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। संसद में पेश किए गए आम बजट से नौकरीपेशा लोगों को टैक्स में मामूली छूट मिलने से निराशा हाथ लगी है। नए टैक्स स्लैब में तीन लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो गई है। इसके अलावा स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत मिलने वाली छूट को 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि आयकर दाताओं को उम्मीद थी कि पांच लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री होगी।
स्मार्ट सिटी में करीब 75 हजार आयकर दाता हैं जो नियमित रूप से सरकार को टैक्स अदा करते हैं। पिछले कुछ वर्षों से महंगाई अपने चरम पर है। खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पेट्रोल, डीजल लेकर रसाेई तक का बजट दोगुने से अधिक हो गया है। बच्चाें की पढ़ाई का खर्च भी लोगों को परेशान कर रहा है। ऐसे में नौकरीपेशा लोगों को उम्मीद थी कि आम बजट में सरकार पांच लाख तक की आय को टैक्स के दायरे से बाहर करेगी, लेकिन मंगलवार को पेश हुए बजट से लोगों को निराशा हाथ लगी। वित्त मंत्री ने नए रिजीम के तहत इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव का ऐलान किया है जिसके तहत 3 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो गई है। इसके अलावा आयकरदाताओं को एक और राहत दी गई है जिसके तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत मिलने वाली छूट को 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं कैपिटल गेन टैक्स के मामले में आम आदमी को बड़ा झटका दिया है।
बजट में पारिवारिक पेंशन काे 15 हजार रुपये से 25 हजार कर दिया गया। ये सरकार का बेहतर कदम है। वहीं आयकर में हुए बदलाव के तहत 3 लाख से 7 लाख रुपये की आय पर 5 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना होगा। पहले ये 6 लाख तक था।
- पंकज मित्तल, सीए एक्सपर्ट
फेसलेस निर्धारण व अपील प्रक्रिया में कॉरपोरेट जगत को आशा थी कि सरकार कुछ विकल्प देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे लोगों को काफी निराशा हुई। वहीं कैपिटल गेन टैक्स के मामले में आम आदमी को बड़ा झटका दिया है। बजट में चुनिंदा फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल एसेट पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को 2.5 फीसदी बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया गया है।
- कपिल मित्तल, सीए
आयकर मामले में सरकार की ओर से दी गई छूट का हम सम्मान करते हैं, लेकिन कैपिटल गेन टैक्स को बढ़ाने से निराशा भी हाथ लगी है।
- मुकेश कुमार, नौकरीपेशा