कांत एंक्लेव: फिल्म स्टूडियो को गिराने में 3 दस्ते जुटे रहे
फरीदाबाद। पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र घोषित होने के कारण कांत एंक्लेव की लाइसेंसी कॉलोनी में इमारतें तोड़े जाने का काम दूसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार को जहां सूरज ढलने तक हुडा, निगम और प्रशासन की टीमों ने 13 प्लॉटों में बनी 12 इमारतों को तोड़ डाला था, वहीं, मंगलवार को फिल्म स्टूडियो को छोड़कर बाकी सभी इमारतों को जमींदोज कर दिया गया। काफी बड़ा होने के कारण स्टूडियो की इमारत को गिराने में तीन दस्ते जुटे रहे। हालांकि, यहां फिल्म स्टूडियो के नाम पर दफ्तर का काम ही होता था।
एमसी मेहता केस में 11 सितंबर 2018 को फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कांत एंक्लेव सहित फरीदाबाद में स्थित अरावली वन क्षेत्र के अधिकतर हिस्से को पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया था। न्यायालय ने कांत एंक्लेव के सभी निर्माण तोड़ कर उसे वन का स्वरूप देने का आदेश जारी किया था। न्यायालय ने वन क्षेत्र में कॉलोनी बसाने का लाइसेंस देने का दोषी हरियाणा सरकार को करार देते हुए यहां रहने वालों को मुआवजा देने का आदेश दिया था। मुआवजा राशि तय होने के बाद इन इमारतों को तोड़ा जाना था।
44 में से 24 लोगों ने 10 फरवरी 2019 को शपथपत्र देकर 31 जुलाई तक अपना निर्माण खुद ही गिराने का वादा किया। शपथपत्र नहीं दिए जाने के कारण बाकी 20 लोगों की इमारत 31 मार्च के बाद तोड़ी जानी थीं। इस दौरान 7 अन्य लोगों ने भी न्यायालय में शपथ पत्र दे दिया, जबकि बिल्डर सहित पांच लोगों ने मुआवजा राशि लेकर इमारतें खाली कर दीं। सोमवार को प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्रवाई की थी। इसमें 13 प्लॉट में बनाए गई 12 इमारतें तोड़ डाली गईं लेकिन यह पूर्णतया ध्वस्त नहीं हुई थीं। मंगलवार को प्रशासनिक टीमों ने तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी रखी।
दोपहर तक 11 अन्य इमारतें तो जमींदोज हो गईं लेकिन फिल्म स्टूडियो का काफी हिस्सा बाकी रहा। मंगलवार शाम तक तीन दस्ते फिल्म स्टूडियो की इमारत गिराने में जुटे रहे। उपायुक्त अतुल कुमार द्विवेदी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अमल कर रिपोर्ट पेश की जानी है। इसलिए कार्रवाई पूर्ण होने तक जारी रहेगी।