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प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता के लिए छोड़ दी बैंक के सहायक प्रबंधक की नौकरी

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ये है जज्बा: प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता के लिए छोड़ दी नौकरी
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फरीदाबाद। प्लास्टिक के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए सेक्टर-17 निवासी वरुण पाल सिंह कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक साइकिल यात्रा करेंगे। वरुण बुधवार 29 अगस्त से अपनी साइकिल यात्रा शुरू करेंगे। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक करीब 45 सौ किलोमीटर का सफर तय करने के लिए वरुण ने 60 दिन का लक्ष्य रखा है। इस सफर में वह 11 राज्यों से होकर गुजरेंगे। रास्ते में जितने भी राज्य व शहर आएंगे, वहां प्लास्टिक प्रयोग न करने को लेकर लोगों को जागरूक करेंगे। वरुण गुरुग्राम स्थित अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक में सहायक प्रबंधक । साइकिल यात्रा के लिए दो माह की छुट्टी नहीं मिल पाने के कारण उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और यात्रा की तैयारी में जुट गए।
हिमालय सफाई अभियान में जुटी हीलिंग हिमालय नामक संस्था से जुड़े वरूण पाल ने बताया कि इस संस्था के पदाधिकारी हिमालय में बड़ी मात्रा में एकत्रित प्लास्टिक को हटाने के अभियान में जुड़े हुए हैं। वह भी इस संस्था के साथ कई बार हिमालय पर्वत पर जाकर वहां जमा कचरा साफ कर चुके हैं। वहां से निकलने वाले कचरे में बहुतायत में प्लास्टिक की बोतलें व अन्य सामान होता है। जोकि यहां घूमने आने वाले लोग छोड़ जाते हैं। यहीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने अब देशभर में प्लास्टिक के प्रयोग न करने के लिए लोगों को जागरूक करने करने निर्णय लिया है।
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वरुण पाल ने के अनुसार आज प्लास्टिक का प्रयोग आमजन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। प्लास्टिक के कचरे से हिमालय पर्वत क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा है। यहां आने वाले लोग कई प्रकार की प्लास्टिक वाला कचरा छोड़ जाते हैं। प्रकृति का यह अनूठा सौंदर्य भी खतरे में पड़ गया है। हम वॉलियंटर बनकर प्लास्टिक को देश से दूर देखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने साइकिल से देश की यात्रा करने का निर्णय लिया है। वरुण इससे पहले मनाली से लेह लद्दाख तक 500 किलोमीटर साइकिल चला चुके हैं। यह यात्रा इन्होंने 9 दिन में पूरी की थी।
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पिछले एक माह से कर रहे तैयारी
वरुण बताते हैं कि साइकलिस्ट होने के कारण उन्हें साइकलिंग में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। मगर इससे पहले कभी वे इतनी लंबी यात्रा पर नहीं गए। ऐसे में इसके लिए कई तरह की तैयारियों की जरूरत थी। वे पिछले एक माह से नियमित रूप से साइकिल चलाने की प्रेक्टिस कर रहे हैं। वरुण के अनुसार पहाड़ में थोड़ी परेशानी हो सकती है, मगर मैदानी क्षेत्र में आने के बाद उनकी रोजाना करीब 100 किलोमीटर यात्रा करने का लक्ष्य है। यात्रा के दौरान कहां ठहरना है, किनसे मिलना है आदि तैयारियां भी करनी थी, इसके लिए पिछले एक माह से वह जुटे हुए हैं।
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