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तो...स्मार्ट सिटी का हिस्सा नहीं है बड़खल गांव

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... तो स्मार्ट सिटी का हिस्सा नहीं है बड़खल गांव
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लोग गंदगी और जलभराव से परेशान, सफाईकर्मी भी नहीं करना चाहते काम, शिकायत पर भी नहीं हो रही कार्रवाई

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। देश के पर्यटन नक्शे पर औद्योगिक नगरी को पहचान दिलाने वाली बड़खल झील जिस गांव के नाम पर मशहूर है, वहां स्वच्छ भारत मिशन नहीं पहुंच सका है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बड़खल गांव स्मार्ट सिटी का हिस्सा नहीं है। यहां सीवर ओवरफ्लो से गांव की सड़कें जलाशय में तब्दील हैं। वहीं कूड़ा हर जगह बिखरा पड़ा है। गंदगी का आलम यह है कि सफाईकर्मी भी यहां काम करने से कतराते हैं। नतीजा यहां कूड़ा, कचरा, गाद और सीवर ओवरफ्लो बड़ी परेशानी बन गई है। गंदगी से छुटकारा पाने के लिए गांव वालों ने निगम अधिकारी से लेकर पार्षद और विधायक के दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

एक दशक पुरानी है जलभराव की समस्या
गांव के मो. शकील बताते हैं कि बड़खल गांव में सड़कों पर जलभराव की समस्या एक दशक पुरानी है। 2014 मेें विधानसभा चुनाव से पहले जलभराव समाप्त करने के लिए गांव में जल्दबाजी में सीवरलाइन डाली गई। लेकिन यह न तो चालू हुई और न ही इसकी निकासी दी गई। सड़क किनारे सीवरलाइन के लिए खोदी गई जमीन भी ठीक से नहीं भरी गई। इस कारण सड़क और उसके आसपास की जमीन बैठ गई। पूरे गांव की सड़कों पर जलभराव रहता है।
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जलभराव खत्म करने का स्थायी बंदोबस्त नहीं
खालिद कहते हैं कि जलभराव की शिकायत कई बार करने पर नगर निगम एक बार मशीन भेजता है, जो पानी खींच कर टैंकर में भर कर ले जाती है, कोई स्थायी बंदोबस्त नहीं किया गया है। नईम उद्दीन बताते हैं कि गांव की आबादी बीस हजार से अधिक है। इतने बड़े गांव मेें सफाईकर्मी नहीं आते। पार्षद को बार-बार फोन करने पर एक दिन आधी-अधूरी सफाई करवाई जाती है।

घरों से उठने लगा कचरा, पर गांव में लगे गंदगी के ढेर का क्या
गांव के मो. आरिफ खान ने बताया कि गांव वाले मिलकर साफ सफाई करवाते हैं, लेकिन कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। यहां तक की ईकोग्रीन वाले भी गांव में नहीं आते थे, पार्षद राकेश भड़ाना ने दबाव डाला तो दो दिन से घरों से कूड़ा कलेक्शन शुरू हुआ। ऐसे में घरों का कूड़ा तो उठ जाएगा ,लेकिन गांव में जो गंदगी के ढेर लगे हैं, उन्हें कब साफ किया जाएगा। आरिफ ने बताया कि सीवर ओवरफ़्लो और कूड़े की वजह से गांव में मच्छरों की भरमार है, आए दिन लोग मलेरिया, डायरिया, उल्टी, बुखार जैसी बीमारियों के शिकार होते रहते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। बीते चार साल में विधायक सीमा त्रिखा से कम से कम बीस बार समस्या बताई गई, पार्षद से भी लगातार शिकायत की जाती है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

कोट
वार्ड में सफाईकर्मियों की कमी है, फरवरी 2017 में हुई निगम सदन की पहली ही बैठक में पर्याप्त सफाईकर्मियों की मांग की थी, जो आज तक पूरी नहीं हुई। थोड़े से सफाईकर्मी इतना बड़ा क्षेत्र देख कर या तो काम नहीं करते या फिर सफाई की औपचारिकता करते हैं। बड़खल गांव ही नहीं सेक्टर 48 के भी बुरे हाल हैं। सीवरलाइन को जुड़वाने के प्रयास किए जा रहे हैं, इससे जलभराव की समस्या समाप्त होगी। सफाई व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई जाएगी।
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राकेश भड़ाना, पार्षद वार्ड 16

कोट
बड़खल गांव में सफाई की समस्या की जानकारी मुझे नहीं है। पार्षद राकेश भड़ाना आज ही आए थे, उन्होंने भी नहीं बताया। संबंधित कार्यकारी अभियंता से गांव की सफाई और जलनिकासी के संबंध में जानकारी लूंगा यदि समस्या है तो उसका समाधान कराया जाएगा।
डीआर भास्कर चीफ इंजीनियर नगर निगम फरीदाबाद
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