पूरे शहर में सुरक्षा के मद्देनजर सीसीटीवी कैमरे लगने हैं, ताकि आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वालों की पहचान में मदद मिल सके, लेकिन इस काम में अब तक किसी भी विभाग ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
इसके लिए अब तक फंड का जुगाड़ भी नहीं हो पाया है। करीब छह माह पहले शहरी स्थानीय निकाय की ओर से नगर निगम सहित अन्य विभागों में सीसीटीवी लगाने के संबंध में पत्र आया था।
पिछले सप्ताह शहरी स्थानीय निकाय के प्रधान सचिव पी. राघुवेंद्र राव ने सभी विभागों को इस दिशा में जल्द कदम उठाने के सख्त आदेश दिए हैं।
इसके बाद से नगर निगम भी हरकत में है। इसके लिए फंड कौन सा विभाग लगाएगा, यह अब तक सवाल है। निगम प्रशासन ने तो इसके लिए फंड न होने पर हाथ खड़े कर दिए हैं।
नगर निगम के कार्यकारी अभियंता अनिल मेहता का कहना है कि यह काम नगर निगम, जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस तीनों को संयुक्त रूप से करना है।
फंड का इंतजाम जिला प्रशासन को करना है, सीसीटीवी का सर्वर और संचालन ट्रैफिक पुलिस के हाथ में होगा और नगर निगम इसके लिए स्थान मुहैया कराएगा। इसके लिए कई दिनों से तैयारी की जा रही है।
शुरुआती चरण में शहर के करीब दो दर्जन स्थानों पर कैमरे लगेंगे। इनमें पार्क, भीड़भाड़ वाले बाजार, मुख्य चौराहे और ऐसे स्थान शामिल हैं, जहां आपराधिक घटनाओं की आशंका रहती है।
निगम प्रशासन के मुताबिक, फंड का इंतजाम वह नहीं करा सकता। पहले यह काम सांसद कोटे से पूरा करने की बात थी, लेकिन वह रकम सड़कों पर खर्च हो चुकी है।