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फरीदाबाद को नहीं रास आ रही मेट्रो, राइडरशिप घटी

Mon, 14 Dec 2015 06:24 PM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद
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फरीदाबाद के बाशिंदों को मेट्रो का सफर रास नहीं आ रहा है। सेवा शुरू करने से पहले डीएमआरसी को प्रतिदिन 1.94 लाख यात्री मिलने की उम्मीद थी।
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6 सितंबर को 24 हजार यात्रियों के साथ शुरू हुआ सफर अक्तूबर में करीब 57 हजार तक पहुंचा था। दिसंबर में यह आंकड़ा घट कर 46 हजार के आसपास रह गया है। समयबद्ध और स्तरीय सेवाएं देने के बावजूद इस रूट पर यात्रियों की घटती संख्या डीएमआरसी के लिए चिंता का विषय है।

वहीं, मेट्रो चलने से शहर में प्रदूषण का स्तर कम होने की उम्मीद थी लेकिन आंकड़े बता रहे हैं मेट्रो से ज्यादा शहरवासियों को निजी वाहन ही रास आ रहे हैं।

फरीदाबाद और राजधानी दिल्ली के बीच बेहतर और तेज यातायात विकसित करने के उद्देश्य से 2012 में मेट्रो प्रोजेक्ट बनाया गया था।

उस समय तैयार की गई एस्टिमेट रिपोर्ट के मुताबिक इस रूट के नौ स्टेशनों पर औसतन 1.94 लाख लोगों के रोजाना यात्रा करने का अनुमान लगाया गया था। 6 सितंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहरवासियों को यह तोहफा दिया था। पहले दिन करीब 24 हजार लोगों ने यात्रा की थी।
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इससे उत्साहित डीएमआरसी अधिकारियों ने इस रूट पर यात्रियों की संख्या तेजी से बढने की उम्मीद जताई थी। सितंबर माह के अंत तक यात्रियों की संख्या करीब 43 हजार प्रतिदिन पहुंची जो अक्तूबर माह में करीब 57 हजार पहुंच गई।

दिसंबर आते आते यात्रियों की संख्या घटकर फिर करीब 46 हजार ही रह गई। डीएमआरसी ने यात्रियों को आकर्षित करने के लिए इस रूट के स्टेशनों पर व्यवसायिक गतिविधियां शुरू करवाईं तो सुविधा के लिए टोकन काउंटर भी शुरू किए। बावजूद इसके यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ी।

मेट्रो प्रवक्ता ने बताया कि फरीदाबाद कॉरिडोर के स्टेशनों पर टोकन वेंडिंग मशीनों के अलावा टोकन काउंटर भी खोले जा रहे हैं। यात्रियों की संख्या जिन स्टेशनों पर ज्यादा है वहां काउंटर से टोकन दिए जा रहे हैं, धीरे धीरे सभी स्टेशनों पर काउंटर शुरू कर दिए जाएंगे।

यह हो सकती हैं वजहें
मेट्रो का बेसब्री से इंतजार करने वाले उद्योग नगरी के लोग इसके आने के बाद इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। लोग इसके पीछे कई कारण मानते हैं।

-स्टेशनों की स्थिति: लोगों का मानना है कि कॉरिडोर के कई स्टेशनों की स्थिति सही नहीं है। एनआईटी एक निवासी अमित भाटिया कहते हैं कि नीलम-अजरौंदा स्टेशन नीलम चौक से दूर है, वहां तक जाने के लिए पहले ऑटो में पांच रुपये खर्च करने पड़ते हैं, यही हाल बाटा स्टेशन का है। उन्होंने कहा कि इस रूट पर कई स्टेशन ऐसी स्थिति पर बने हैं जहां सीधे पहुंचा आसान नहीं है।

-फीडर सेवा की कमी: नेशनल हाईवे के समानांतर बने मेट्रो स्टेशन शहरी आबादी से सीधे कनेक्ट नहीं होते। इन स्टेशनों तक लाने-ले जाने के लिए फीडर बस सेवा शुरू नहीं हुई है। ऐसे में लोग दूसरे विकल्प इस्तेमाल करते हैं।
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-सस्ती लोकल दे रही टक्कर: लोकल रेलवे ट्रेन (ईएमयू, शटल) की समय पर उपलब्धता और सस्ती यात्रा मेट्रो के रास्ते में बाधा बन रही है। शहर के भीतर आ चुके बल्लभगढ़, न्यू टाउन और ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशनों तक लोगों की आसान पहुंच है। एनआईटी तीन में रहने वाले विष्णु गोयल कहते हैं कि डेली पैसेंजर्स के लिए मेट्रो महंगी है। नई दिल्ली की एमएसटी दो सौ रुपये के अंदर बनती है जबकि मेट्रो में एक दिन दोनों तरफ का किराया भी पचास रुपये से ज्यादा होता है। मजबूरी में मेट्रो वरना अपनी लोकल ठीक है।

फरीदाबाद कॉरिडोर की राइडरशिप
स्टेशन-----------मेट्रो का अनुमान-------अक्तूबर में-------वर्तमान में
सराय ख्वाजा-----------18,055---------------5300----------4540
एनएचपीसी चौक--------8,355----------------4400----------3249
मेवला महाराजपुर--------937------------------4000----------1689
सेक्टर28---------------10,648--------------2100-----------3221    
बड़कल मोड़-------------936-----------------5700------------005
फरीदाबाद ओल्ड---------35,427--------------6900------------696
नीलम चौक अजरौंदा-----12,837--------------8100------------6637
बाटा चौक---------------32,582--------------7000------------5651
एस्कॉट्र्स मुजेसर---------53757--------------13,300-----------11216

कुल 9 स्टेशन-------1.94 (लाख)------- 56,800--------45,899
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