फरीदाबाद में भारत साक्षर मिशन के तहत शिक्षा का अलख जगा रहे प्रेरक इन दिनों खासे परेशान हैं। जिले के 200 से अधिक प्रेरकों को आठ माह से वेतन नहीं मिला है।
मिशन में प्रेरक का रोल निभाने वालों से यहां अपनी सेवाएं देने से पहले एक वर्ष का बांड भरवाया गया था, जिसमें अन्य जगह काम न करने की सख्त हिदायत दी गई थी। ऐसे में आठ माह से वेतन न मिलने के चलते प्रेरकों के घर में चूल्हा भी रामभरोसे जग रहा है।
बुनियादी शिक्षा से महरूम व्यस्कों में अक्षर ज्ञान की अलख जगाने के लिए केंद्र सरकार ने 'साक्षर भारत मिशन की शुरूआत की थी। मिशन के तहत जिले की प्रत्येक पंचायत में दो-दो प्रेरकों को तैनात किया गया था।
प्रत्येक प्रेरक का मानदेय दो हजार रुपये प्रति माह सहित प्रत्येक शिक्षा केंद्र पर 75 हजार रुपये वार्षिक खर्च निर्धारित किया गया। अन्य खर्च तो दूर कि बात है प्रतिदिन केंद्र पर 6 घंटे काम करने वाले प्रेरकों को पिछले आठ माह से मानदेय नहीं मिल पाया है।
इस दौरान उनसे एक वर्ष का बांड भरवाकर सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में अपनी सेवाएं न देने की बात कही थी। जिसके कारण प्रेरक अन्य जगह नौकरी भी नहीं कर पा रहे हैं। बता दें इस समय जिले के 110 गांवों में 202 प्रेरक काम कर रहे है।
प्रेरक जितेंद्र, मनजीत, रूपलाल, इंदू और सुमेधा का कहना है कि हरियाणा सरकार हमारा शोषण कर रही है। एक ओर मुख्यमंत्री न्यूनतम मजदूरी 9699 रुपये प्रति माह कर दी है। ऐसे में प्रेरकों से दो हजार रुपये प्रति माह में काम करवाना तानाशाही को दर्शाता है।
संसाधनों के नाम पर शिक्षा केंद्रो को एक मेज, दो कुर्सी उपलब्ध करवाई गई है, जो घटिया गुणवत्ता की है। शिक्षा केंद्रों को पाठ्य सामग्री दो साल से नहीं आई है। उधर, जिला समन्वयक सुशील कुमार का कहना है कि वेतन समस्या को लेकर वे कई बार उच्चाधिकारियों को जानकारी दे चुके हैं। मामला सरकार के हाथ में है।