वाईएमसीए से दिल्ली के बीच सीधी मेट्रो सेवा शुरू होने से यात्री अब रोडवेज बसों से तौबा कर रहे हैं। मंगलवार सुबह बसों में यात्रियों की कमी साफ दिखाई दे रही थी।
निजी बसों के कंडक्टर सवारियों के लिए लंबे समय तक स्टॉपेज पर खड़े होकर आवाज लगाते रहे। डीटीसी और रोडवेज की सरकारी बस सेवा का नजारा भी कुछ ऐसा ही था। सिटी बसें जो पहले बल्लभगढ़ से बदरपुर के बीच पांच से छह चक्कर रोज लगा रही थीं, मंगलवार को बमुश्किल तीन चक्कर लगा पा रही हैं।
दिल्ली से फरीदाबाद आना अभी तक लोगों के लिए एक बड़ी समस्या थी। मेट्रो में सफर करने वाले यात्री बदरपुर मेट्रो स्टेशन पर उतरकर वहां से बाहर बदरपुर बॉर्डर पर आते थे। वहां से तिपहिया या फिर बस में सफर कर गंतव्य तक पहुंचते थे।
यह सफर उनको काफी थका देने के साथ-साथ जेब पर भी भारी पड़ता था। लेकिन, रविवार शाम को शुरू हुई मेट्रो ने यात्रियों को काफी राहत मिली है। जबकि बसों की आमदनी तिहाई कर दी है। आलम ये है कि बस कंडक्टर और ऑटो चालक बदरपुर जाने के लिए आवाज लगाते हैं। लेकिन, उन्हें सवारी भाव ही नहीं देती।
एक्सप्रेस सर्विस के कंडक्टर दिनेश ने बताया कि शनिवार तक बल्लभगढ़ से बदरपुर तक हर चक्कर में 1200 रुपये की आमदनी हो रही थी, लेकिन रविवार शाम से मेट्रो चलने के बाद प्रति चक्कर 7-8 सौ रुपये से ज्यादा नहीं मिले।
गुड़गांव जाने वाले यात्री भी अब एसी वोल्वो व नॉन एसी बस से इतर होने लगे हैं। यात्री मोहन ने बताया कि जब मेट्रो से गुड़गांव 30 रुपये में पहुंचा जा सकता है तो एसी बस में 60 और नॉन एसी में 43 रुपये क्यों दें।
ऑटो का धंधा भी पड़ा मंदा
फरीदाबाद से बदरपुर तक तक पहुंचने के लिए पहले बस और ऑटो से अलग कोई विकल्प नहीं था, लेकिन अब मेट्रो का शानदार विकल्प यात्रियों को मिल गया है। एस्कॉर्ट्स मुजेसर से यात्री 18 रुपये में बदरपुर तक का सफर कर रहे हैं। इसके चलते हाईवे पर ऑटो वालों का धंधा भी मंदा पड़ गया है। पहले लाइन लगाकर ऑटो वाले सवारियां उठाते थे। वहीं सोमवार और मंगलवार को ऑटो यात्रियों के इंतजाम में खाली खड़े दिखे। ऑटो चालक मिथुन ने बताया कि पहले रोजाना पांच चक्कर लगाकर अच्छी खासी आमदनी हो जाती थी, लेकिन मेट्रो आते ही सवारियां गायब सी हो गई हैं।