दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नकली दवाइयां बनाने वाली फैक्टरी का किया खुलासा, इस मामले में पुलिस पहले आठ आरोपियों को कर चुकी है गिरफ्तार, अब नौवीं गिरफ्तार
भारी मात्रा में नकली दवाइयां और मशीनें बरामद, पकड़े गए आरोपी अरुण का पूछताछ कर रही पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अपराध शाखा की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को एक सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी कामयाबी मिली है। पटना में नकली दवाइयों की फैक्टरी के खुलासे के बाद अब बिहार के गया में टीम ने एक और नकली दवाइयां बनाने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस संबंध में अरुण (59) नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने इसकी फैक्टरी से 1.20 लाख नकली जिंक की टैबलेट, 42,480 नकली एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट, 27 किलोग्राम पैरासिटामोल और डिलोना एक्वा के 444 नकली इंजेक्शन व भारी मात्रा में दवाई बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीन, पैकेजिंग मशीन व अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है। अपराध शाखा के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सितंबर माह से लगातार हो रही कार्रवाई के बाद पुलिस ने नकली दवाओं के मामले में नौवीं गिरफ्तारी की है। आरोपी पिछले करीब तीन सालों से बिना लाइसेंस के ही नकली दवाई बनाने में लिप्त हैं। इनका गिरोह खासकर साइकोट्रोपिक (नशीली दवाइयां) बनाकर मार्केट में सप्लाई कर रहा है।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि सितंबर 2025 में अपराध शाखा ने नकली दवाई बनाने के मामले में एक एफआईआर दर्ज कर अनिरुद्ध नामक आरोपी को दबोचा था। उसके पास से भारी मात्रा में ट्रामाडोल पाउडर मिला था। इसकी मदद से नशीली दवाइयां बनाई जा रही थी। टीम ने लगातार कार्रवाई कर एक-एक कर कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया। 9 फरवरी को पुलिस ने पटना से तनिष्क झा (24) को आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी नकली दवाई बनाने की फैक्टरी का खुलासा किया था। उसके यहां से भारी मात्रा में नकली दवाइयों के अलावा कफ सिरप की खाली बोतलें बरामद हुई थीं।
तनिष्क से पूछताछ के बाद गया की फैक्टरी का हुआ खुलासा...
एसीपी सत्येंद्र मोहन व इंस्पेक्टर नितिश कुमार की टीम ने आरोपी तनिष्क से पूछताछ की तो पता चला कि गया में भी अरुण नामक व्यक्ति दवा बनाने की नकली फैक्टरी चला रहा है। टीम ने अरुण की जानकारी जुटाना शुरू की। जांच में पता चला कि आरोपी लाइफ केयर साइसेंज के नाम से नकली फैक्टरी चला रहा है। शुक्रवार को एक टीम गया पहुंची और फैक्टरी की पहचान कर वहां छापा मारा। टीम ने अरुण को दबोच लिया। उसकी फैक्टरी से भारी मात्रा में नकली दवाइयां बरामद हुई। जांच में पता चला कि आरोपी बिना लाइसेंस के ही नकली दवाइयां बना रहा था। पुलिस की टीम ने गया से ड्रग डिपार्टमेंट को मौके पर बुलाया। बाद में छापेमारी की गई। जांच में पता चला कि आरोपी पांच करोड़ के ट्रामाडोल पाउडर से नशे की नकली दवाइयां बना रहा था। इन टैबलेट का इस्तेमाल हेरोइन के बदले किया जा रहा था। पुलिस आरोपी की फैक्टरी से जुड़े बाकी आरोपियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। आरोपी से लगातार पूछताछ जारी है।