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Delhi NCR News: इंदौर में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, 6 साइबर ठग गिरफ्तार

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-पश्चिम जिला साइबर सेल ने की कार्रवाई, आरोपी देशभर के लोगों को फर्जी ऑनलाइन निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का शिकार बना रहे थे
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
पश्चिमी जिले की साइबर सेल ने मध्य प्रदेश के इंदौर में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस ने छह साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी देशभर के लोगों को फर्जी ऑनलाइन निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी का शिकार बना रहे थे। पुलिस जांच में करीब एक करोड़ की ठगी का खुलासा हुआ है। जिला पुलिस उपायुक्त दरादे शरद भास्कर ने बताया कि गिरोह मेटा कोट्स नामक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिये लोगों को निवेश के लिए फंसाता था। निवेशकों को नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड पर भारी मुनाफा दिखाकर अधिक रकम जमा कराने के लिए प्रेरित किया जाता था। बाद में जीएसटी, टीडीएस, पेनल्टी, लीवरेज चार्ज और अकाउंट अनलॉक फीस के नाम पर ठगी की जा रही थी। शिकायतकर्ता मनोज चौहान ने साइबर सेल में ठगी की शिकायत की। जिसमें उन्होंने बताया कि आस्था मैडम नाम की महिला ने उन्हें फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। आरोपी अलग-अलग बैंक खातों में उनसे कुल 10.51 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए।
लेकिन पैसे वापस मांगने पर उसके नंबर को ब्लॉक कर दिया। मामले की जांच के दौरान पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी, मोबाइल ट्रैकिंग, आईएमईआई विश्लेषण और बैंक खातों की जांच के बाद इंदौर स्थित बीजेटी ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के ऑफिस पर छापा मारा। वहां 41 लोग काम करते हुए पाए गए, जिसमें 35 टेली कॉलर शामिल थे। जांच में पता चला कि आरोपी फर्जी पहचान के जरिये देशभर के लोगों को कॉल कर निवेश के नाम पर ठगी कर रहे थे। पुलिस ने यहां से 47 मोबाइल फोन, 46 सिम कार्ड, 29 कंप्यूटर सिस्टम, 10 चेक बुक, दो पीओएस मशीनें, नकदी, विदेशी मुद्रा, डेबिट कार्ड, पासपोर्ट और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया। जिसमें फर्जी कॉल सेंटर का मालिक कार्तिक अग्रवाल, सहयोगी राजा अग्रवाल, टीम लीडर हर्ष केशरे, निखिल भालसे, दीपक उमाथ और विपिन यादव शामिल है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरोह का सरगना कार्तिक अग्रवाल पहले ब्रोकरेज और ट्रेडिंग कंपनियों में काम कर चुका है। उसने टेलीग्राम नेटवर्क के जरिए फर्जी ट्रेडिंग एप और लिंक हासिल किए थे। गिरोह इंडिया मार्ट और टेलीग्राम चैनलों से लोगों का डाटा खरीदता था और फिर उन्हें गोल्ड, सिल्वर, निफ्टी, बैंक निफ्टी और यूएसडीटी ट्रेडिंग के नाम पर निवेश के लिए फंसाता था। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
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