रोडवेज की शक्ल में सड़कों पर चल रही नकली बसों का मामला गहराता जा रहा है। सड़क परिवहन अथॉरिटी को सोमवार को राजस्थान का कार्यालय खुलने का इंतजार है। हरियाणा रोडवेज की नकली बसों के पकड़े जाने का मामला सुर्खियों में है।
इस मामले में हरियाणा परिवहन विभाग के अधिकारी भी चुप्पी साधे हुएहैं। इतनी संख्या में नकली बसों के पकड़े जाने के बाद अधिकारियों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
सवाल यह उठ रहा है कि काफी समय से हरियाणा रोडवेज की नकली बसें धड़ल्ले से अलग-अलग रूटों पर दौड़ रही थीं और इसकी भनक न तो आरटीए को लगी और न ही हरियाणा रोडवेज के अधिकारियों की।
इस संबंध में जब हरियाणा रोडवेज गुड़गांव के जीएम से बात की गई तो उन्होंने इसे आरटीए की कार्रवाई बताकर पल्ला झाड़ लिया। सूत्र बताते हैं कि अभी तो आरटीए ने गुड़गांव से इन नकली बसों को जब्त किया है, जबकि हरियाणा के अन्य कितने रूटों पर ऐसी बसें चल रही हैं।
ऐसे में हरियाणा सरकार के राजस्व को काफी नुकसान हुआ है। सवाल यह भी है कि क्या कार्रवाई के बाद विभाग इसकी वसूली भी करेगा। एक नहीं दो राज्य की सरकारों की आंखों में धूल झोंक कर निजी बस संचालक इन नकली बसों को बेखौफ होकर चला रहे थे।
आरटीए के असिस्टेंट सेक्रेटरी भारत भूषण ने बताया था कि पकड़ी गई बसें सोहना रोड, मानेसर, रेवाड़ी व जयपुर रूट पर चलाई जाती थीं। आरटीए अधिकारियों के अनुसार ये लोग निजी बसों को हरियाणा रोडवेज की बसों की तरह पेंट कराकर सड़क पर चला रहे थे।