मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को फैक्ट्री लाइसेंसिंग नियमों में ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की है। अब दिल्ली सरकार या दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएसआईआईडीसी) की ओर से मान्यता प्राप्त औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियों को एमसीडी से अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। यह कदम ''ईज ऑफ लिविंग'' और ''ईज ऑफ डूइंग बिजनेस'' को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। इससे उद्यमियों को राहत मिलेगी।
अगर फैक्ट्री के पास एमएसएमई उद्यम पंजीकरण या दिल्ली सरकार या डीएसआईआईडीसी का अलॉटमेंट लेटर, लीज डीड है, तो वही डीएमसी एक्ट की धारा 416/417 के तहत लाइसेंस के रूप में मान्य होगा। इससे फैक्ट्री मालिकों को बार-बार एमसीडी के चक्कर काटने से छुटकारा मिल गया है।
उन्हें सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स का 5 फीसदी शुल्क जमा करना होगा, जिसके बाद वे अपने दस्तावेज डाउनलोड कर लाइसेंस के तौर पर इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, अग्नि सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और निर्माण नियमों का पालन करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, यह कदम दिल्ली को कारोबार के लिए आसान और पारदर्शी बनाएगा।
छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए फायदेमंद
यह बदलाव खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे समय और पैसे की बचत होगी। इसमें प्रॉपर्टी टैक्स की ऑनलाइन प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार और देरी कम होगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इससे दिल्ली में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा।
पुराने लाइसेंस वैध रहेंगे, लेकिन नवीनीकरण के लिए नई प्रक्रिया अपनानी होगी। एमसीडी ने इस आदेश को तुरंत लागू कर दिया है और सभी जोनल डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश जारी किए गए हैं। यह कदम दिल्ली को व्यवसायिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम है।