रोशनी गंवा चुके नौ लोगों की जिंदगी भी खतरे में पड़ गई है। आंखें नहीं निकलवाने की सूरत में इंफेक्शन से उनकी जान पर बन आई है। दिल्ली एम्स अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक आंखों से इंफेक्शन दिमाग की ओर बढ़ रहा है।
इसके चलते हापुड़ पंचशील कालोनी निवासी एक वृद्ध महिला मरीज की एम्स में एक आंख निकालकर डॉक्टर उसकी जिंदगी बचाने में जुटे हैं। बाकी आठ मरीजों की आंख से भी पानी बह रहा है। दर्द से उनकी हालत खराब है।
उधर, सब कुछ सामने होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन जांच कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है, जबकि अस्पताल मैनेजमेंट चुप्पी साधे हुए है।
लापरवाही का दंश झेल रहे मरीज और परिजन
मोदीनगर के गिन्नी देवी मोदी नेत्र चिकित्सालय सात नवंबर को नौ लोगों की आंखों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। इसमें सात मरीज हापुड़, दो मोदीनगर और अमरोहा संभल के रहने वाले हैं।
ऑपरेशन के दो दिन बाद इन मरीजों की एक-एक आंख की रोशनी चली गई थी। इन सभी मरीजों को आननफानन में दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। एम्स में चल रहे इलाज में मरीजों की हालत सुधरने की जगह बिगड़ती जा रही है।
एम्स में इंफेक्शन बढ़ने के कारण पंचशीलनगर हापुड़ निवासी जगवती की एक आंख निकाल ली गई है। दर्द से बेहाल जगवती को परिजनों ने सात नवंबर को एम्स में भर्ती कराया।
हालात काबू में न आने पर चिकित्सकों ने खराब हो चुकी आंख सोमवार रात में निकाल दी। छह अन्य मरीजों की ऑपरेशन हुई आंख में इंफेक्शन है। आंखों से पानी आ रहा है।
एक आंख से कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। परिजनों का कहना है कि चिकित्सक आंख की रोशनी खत्म होने की पुष्टि कर चुके हैं। बहरहाल इंफेक्शन रोकने का उपचार जारी है।
पहले आंखों की रोशनी और अब मरीजों की जिंदगी खतरे में होने की सूचना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन एवं अस्पताल मैनेजमेंट कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है।
मरीज के परिजन निजी खर्च पर मरीजों का इलाज कराने को मजबूर है। आरोप है कि अभी तक अफसरों ने किसी मरीज के घर पहुंचकर उसकी सुध नहीं ली है।
सो रहे अफसर, एम्स के चक्कर लगा रहे मरीज
मोदीनगर के चैरिटेबल अस्पताल में आंखों की रोशनी गंवा चुके मरीज बेहाल हैं, लेकिन एक माह बाद भी स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी हालचाल लेने घर नहीं पहुंचे।
तीमारदारों का कहना है कि आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण इलाज में परेशानी आ रही है। मरीजों को दिल्ली एम्स के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
आलम यह है कि पीड़ित मरीजों को प्रत्येक सप्ताह दिल्ली एम्स में किराये की गाड़ी लेकर जाना पड़ रहा है। आने जाने मे ही मरीजों के हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा दवाओं का खर्च भी उन्हें ही झेलना पड़ रहा है।
सस्ते के चक्कर में कराया ऑपरेशन, पड़ा महंगा
ऑपरेशन के बाद आंख गंवाने वाले अधिकांश मरीज गरीब हैं। पैसों की तंगी के कारण ही चैरिटेबिल अस्पताल में ऑपरेशन कराया था, लेकिन ज्यादा महंगा पड़ गया।
परिजनों ने बताया कि दिल्ली के एम्स अस्पताल का पूरा खर्चा उन्हें वहन करना पड़ रहा है। चिकित्सक दवाएं भी बाहर से लिख रहे हैं। आने-जाने का खर्च भी अलग है।
इन मरीजों ने गंवाई आंख की रोशनी
मोदीनगर के अस्पताल में ऑपरेशन के बाद आदर्शनगर कालोनी निवासी फूलवती, जसरूपनगर निवासी राजेंद्री, पंचशील नगर निवासी जगवती, कोटला मेवतियान निवासी फरजाना, जुम्मन, मजीदपुरा निवासी आमना खातून, देवली गेट निवासी शिक्षा देवी, संभल निवासी लाला सिंह, मोदीनगर निवासी ब्रह्मो देवी की एक-एक आंख की रोशनी जा चुकी है।