दिल्ली के तीनों नगर निगमों के चुनावों के लिए मतदान के बाद अब दिल्ली व देश की राजनीति में भविष्य के कई सवाल खड़े होंगे। एग्जिट पोल सही निकले तो भ्रष्टाचार के आंदोलन से जन्म लेकर वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक 67 सीटों के साथ 54.30 फीसदी मत लेने वाली आम आदमी पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर खतरे के बादल मंडरायेंगे।
दरअसल, वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की खींची गई लंबी लकीर को छोटा करने की कवायद में भाजपा व कांग्रेस जुटी हुई है। इसके बाद डूसू चुनाव, नगर निगम के बाई इलेक्शन व पंजाब सहित अन्य राज्यों के चुनाव में आप का ग्राफ लगातार गिरता दिखा। अब नगर निगम चुनाव आप का मौजूदा ग्राफ जांचने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम है।
ऐसे में आम आदमी पार्टी अगर कांग्रेस से मुकाबले में दूसरे या तीसरे स्थान पर रहती है तो आगामी तीन सालों में दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए उसे अपना राजनैतिक भविष्य बचाने को कुछ सोचना पड़ेगा। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अजय माकन, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी व आप के संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का राजनैतिक कद भी यह चुनाव परिणाम तय करेंगे। सबसे ज्यादा फायदा हासिल करने वाले इनके बीच मनोज तिवारी ही रहेंगे।
परिणाम एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा को प्रचंड बहुमत के रूप में मिलते हैं तो मनोज तिवारी आगामी मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट होने के साथ ही भाजपा में उनका कद भी बढ़ जाएगा। यह बात अलग है कि इस चुनाव में भी भाजपा ने मोदी के नाम पर ही वोट मांगे। दूसरी ओर ऐसे हालात भी हो सकते हैं विधानसभा चुनाव में शून्य पर रही कांग्रेस फिर से भाजपा से मुख्य मुकाबले में आ जाए।
तीनों ही दलों ने झोंक रखी थी ताकत
BJP
नगर निगम के चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल मानकर तीनों ही प्रमुख दलों ने कई महीनों से ताकत झोंकी हुई थी। मतदान के दौरान भाजपा कार्यकर्ता अपने पक्ष में मतदान पाकर बेहद उत्साहित दिखे। दरअसल, भाजपा, कांग्रेस व आप ने इस चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए कई प्रयोग भी किए थे।
भाजपा के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने जहां अपने सभी मौजूदा पार्षदों को टिकट न देने की घोषणा की थी वहीं, प्रदेश कांग्रेस के भी पहली पंक्ति के नेताओं को टिकट वितरण में विश्वास में लेकर अजय माकन ने बड़ा रिस्क लिया। आम आदमी पार्टी ने भी इस चुनाव में अपनी रणनीति कई बार बदली। प्रधानमंत्री मोदी को लगातार टारगेट करने वाले आप सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोदी पर सीधा हमला नहीं किया।
तीनों ही दलों ने झोंक रखी थी ताकत
MCD ELECTION
नगर निगम के चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल मानकर तीनों ही प्रमुख दलों ने कई महीनों से ताकत झोंकी हुई थी। मतदान के दौरान भाजपा कार्यकर्ता अपने पक्ष में मतदान पाकर बेहद उत्साहित दिखे। दरअसल, भाजपा, कांग्रेस व आप ने इस चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए कई प्रयोग भी किए थे।
भाजपा के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने जहां अपने सभी मौजूदा पार्षदों को टिकट न देने की घोषणा की थी वहीं, प्रदेश कांग्रेस के भी पहली पंक्ति के नेताओं को टिकट वितरण में विश्वास में लेकर अजय माकन ने बड़ा रिस्क लिया। आम आदमी पार्टी ने भी इस चुनाव में अपनी रणनीति कई बार बदली। प्रधानमंत्री मोदी को लगातार टारगेट करने वाले आप सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोदी पर सीधा हमला नहीं किया।