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Excise policy scam: चार्जशीट में अपराध का एक भी सबूत नहीं, उलटे जांच अधिकारियों पर ही कार्रवाई की सिफारिश

Sat, 28 Feb 2026 06:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने 598 पेज के अपने आदेश में कहा कि मुख्य चार्जशीट (24 नवंबर 2022) और चार पूरक चार्जशीटों में अपराध का एक भी ठोस सबूत नहीं है।
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demo - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
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विस्तार
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दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले में सीबीआई की हजारों पन्नों की चार्जशीट को राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने 598 पेज के अपने आदेश में कहा कि मुख्य चार्जशीट (24 नवंबर 2022) और चार पूरक चार्जशीटों में अपराध का एक भी ठोस सबूत नहीं है।

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अदालत ने सीबीआई जांच को विरोधाभासी और हेरफेर से भरी बताते हुए जांच अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की। जज ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि दस्तावेज गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते, अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इसमें कोई आपराधिक साजिश का साक्ष्य नहीं मिला।

अदालत ने सुनवाई के दौरान एजेंसी पर कई बार नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हजारों पेजों में पेश तथ्य गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। फैसले में जेल में बिताए समय पर भी टिप्पणी की। अदालत ने नोट किया कि मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे, जबकि अरविंद केजरीवाल दो बार के अंतराल में 156 दिन हिरासत में थे।
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केजरीवाल को 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI मामले में जमानत दी थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई की चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्तुत दस्तावेज चार्जशीट से मेल नहीं खाते। आरोप तय करने पर 12 फरवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रखा गया था।

राजनीतिक विद्वेष के लिए जोड़ा गया केजरीवाल का नाम
सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने दलील दी कि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। हरिहरन ने कहा, केजरीवाल सरकारी काम कर रहे थे। कोई साक्ष्य नहीं कि उन्होंने साउथ लॉबी से पैसे मांगे। उनका नाम पहले तीन चार्जशीट में नहीं था, चौथे पूरक में जोड़ा गया।

जज ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कन्फेशनल स्टेटमेंट पर नाराजगी जताई। जब सीबीआई ने कहा कि बयान सील कवर में है, तो जज बिफर पड़े, मुझे अभी तक कॉपी नहीं दी गई। मैं जांच एजेंसी के वकीलों से पूरी ईमानदारी की उम्मीद करता हूं।

टिप्पणी में जज ने कहा, जब आप किसी फाइल को बहुत गहराई से और बार-बार पढ़ते हैं, तो फाइलें आपसे बात करने लगती हैं। इसका इशारा चार्जशीट की विसंगतियों की ओर था, जहां हजारों पन्नों में कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

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