राजधानी में आबकारी विभाग को लगातार आए दो चुनाव के बाद भी घाटा झेलना पड़ा। विभाग रिवाइज टारगेट को भी पूरा नहीं कर सका।
एक दशक की बात करें तो आबकारी राजस्व 708 करोड़ रुपये से बढ़कर 3151 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
दिल्ली सरकार के खजाने में पैसे की भागीदारी बिक्री एवं कर विभाग व राजस्व विभाग के बाद आबकारी विभाग की होती है। एक दशक से सरकार ने विभाग को राजस्व प्राप्ति का जो लक्ष्य दिया, उसे न सिर्फ पूरा किया गया बल्कि अधिक कर जमा हुआ।