भारतीय जनता पार्टी एक ओर जहां पूरे देश में नरेंद्र मोदी की लहर होने की बात कर रही है तो वहीं विरोधी पार्टियों के साथ ही धर्मगुरुओं ने भी इसके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी आजकल हर किसी के निशाने पर हैं। अभी तक विरोधी दल मोदी की पत्नी और गुजरात दंगों को लेकर उन पर निशाना साध रहे थे लेकिन सोमवार को दिल्ली में एक संप्रदाय के पूर्व प्रधान ने भी मोदी के विरोध में सुर उठाए।
उन्होंने मोदी ही नहीं भाजपा और अकाली दल को भी नहीं बख्शा और जमकर शब्द बाण छोड़े।
'भाजपा का हारना जरूरी'
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान परमजीत सिंह सरना ने कहा है कि देश की एकता व अखंडता के लिए सांप्रदायिक पार्टियों को हराना जरूरी है।
एक बयान जारी कर उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि राम मंदिर का मुद्दा उठाकर वह हिंदुओं की भावनाओं को भड़का रही है।
प्रधानमंत्री का चुनाव लोकसभा में जीत कर पहुंचने वाले पार्टी के सांसद करते हैं, लेकिन भाजपा ने पहले ही नरेंद्र मोदी के नाम का ऐलान कर दिया। पार्टी के हाथ 2002 में हुए गुजरात दंगों के खून से रंगे हुए हैं।
मोदी के बारे में ऐसा बयान
उन्होंने कहा कि मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का मतलब है अल्पसंख्यकों को फांसी का वारंट जारी करना जैसा होगा। सरना ने पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि वो बैसाखी पर्व को भुला चुके हैं। गुरु गोबिंद सिंह ने धर्म निरपेक्षता का सबूत देते हुए पंच प्यारों का चुनाव करके एक न्यारे खालसा पंथ को बनाया, जिसमें अमृतधारी ही इसका पदाधिकारी बनता था।
सरना का आरोप है कि अकाली दल बादल ने इस परंपरा को ही खत्म कर दिया। बादल ने एक सांप्रदायिक पार्टी की हिमायत कर पंथ विरोधी काम किया है।