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कई समीकरण बदलेगा इनेलो का ‘अवतार’

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इनेलो को कांग्रेस और भाजपा के वोटों में सेंध लगाने के लिए आखिरकार एक ‘अवतार’ मिल गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं फरीदाबाद के पूर्व सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना अपने इस्तीफे के 15 दिन बाद पुराने घर इंडियन नेशनल लोकदल में दाखिल हो गए।
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इस बड़े उलटफेर के बाद जिले की कई विधानसभा सीटों पर जीत-हार के समीकरण बदल सकते हैं। क्योंकि गुर्जर वोटों को वह प्रभावित करेंगे। इस समय इनेलो के पास कुछ सीटों पर मजबूत उम्मीदवार नहीं हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि भड़ाना अपने समर्थकों को चश्मा पहनवाकर चुनाव लड़वाएंगे, ताकि वह लोकसभा चुनाव के दौरान उनसे भितरघात करने वालों को सियासी जवाब दे सकें।
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सूत्रों का कहना है कि उनके निशाने पर एनआईटी, तिगांव, बल्लभगढ़ एवं पलवल सीट मुख्य तौर पर हैं। इन पर उन्हें लोकसभा चुनाव में जबरदस्त भितरघात का सामना करना पड़ा था।

भड़ाना को मिली है खुली चुनौती

अवतार भड़ाना की इनेलो में एंट्री के बाद कई लोगों की टिकट पर संकट के बादल छा गए हैं। चर्चा यही है कि भड़ाना ने अपने लिए राज्यसभा जाने और कुछ समर्थकों को टिकट दिलवाने की हामी भरवाई है। तिगांव में एक कांग्रेसी गुर्जर नेता उनके साथ आ सकता है।

हालांकि इसकी किसी बड़े नेता ने इसकी पुष्टि नहीं की है। जबकि शहरी जिलाध्यक्ष आरके चिलाना का कहना है कि पूर्व सांसद के पार्टी में आने से यहां पर विधानसभा चुनाव की रंगत बदल जाएगी। भड़ाना अपने पुराने घर में आकर क्या रंग दिखा पाएंगे यह तो वक्त ही बताएगा। क्योंकि इनेलो के लिए शहरी सीटों का रास्ता इतना आसान नहीं है।

उधर, श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शिवचरण लाल शर्मा के पुत्र एवं भाजपा नेता नीरज शर्मा का कहना है कि उनकी भड़ाना को खुली चुनौती है। वह या तो खुद एनआईटी से चुनाव लड़ लें या फिर किसी और को लड़ा दें। कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

जब बिना विधायक बने मिल गया मंत्री पद

भड़ाना के कांग्रेस छोड़ने की पटकथा लोकसभा चुनाव में ही लिख दी गई थी। तीन माह के इंतजार के बाद भी जब 50 भितरघातियों में से किसी पर कार्रवाई नहीं की गई तो उन्होंने कांग्रेस को छोड़ना उचित समझा। लोकसभा चुनाव में उन्हें पलवल, एनआईटी, तिगांव एवं बल्लभगढ़ में जबरदस्त भितरघात का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार (करण सिंह दलाल) ने भी उन्हें हराने का काम किया। इसलिए सीएम को या तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए या फिर इस्तीफा देना चाहिए।

उन्होंने शिकायत पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी एवं हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी शकील अहमद से की, लेकिन भितरघातियों पर कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे सीएम ने उन लोगों की जनसभाओं में शिरकत की जिन पर भड़ाना दगेबाजी का आरोप लगा रहे थे।

अवतार भड़ाना का इंडियन नेशनल लोकदल से पुराना नाता है। वर्ष 1988-89 में हरियाणा के मुख्यमंत्री चौ. देवीलाल ने भड़ाना को बिना विधायक बने छह माह के लिए स्थानीय निकाय मंत्री बनाया था। इसलिए वह चौटाला परिवार से जुड़ गए। दिल्ली में अजय चौटाला और अवतार सिंह भड़ाना की कोठी साथ-साथ है।
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भड़ाना का राजनीतिक कॅरियर:

-17 दिसंबर 1957 में जन्म (गांव अनंगपुर, फरीदाबाद)
-1984 से 86 तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त सचिव
-1987 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन सचिव
-वर्ष 1988-89 में हरियाणा के स्थानीय निकाय मंत्री
-1991 में फरीदाबाद से सांसद
-1999 में मेरठ (उत्तर प्रदेश) से सांसद बने
-2004 व 2009 में फरीदाबाद से लोकसभा पहुंचे
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