दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित समेत उनकी सरकार के मंत्रियों को बाजार दर से सरकारी आवास का किराया देना होगा। फिलहाल दो मंत्री सरकारी आवास में रह रहे हैं।
वहीं, शीला दीक्षित ने चुनाव हारने के बाद अपना सरकारी आवास खाली कर दिया है, लेकिन नियत समय से पंद्रह दिन बाद बंगला खाली पर उन्हें भी किराया देना होगा।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक, सभी आवासों का किराया 2.90 लाख रुपये प्रतिमाह या इससे ज्यादा है। इसकी वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बता दें कि बीते 28 दिसम्बर को केजरीवाल सरकार के शपथ लेने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शीला सरकार व उनके मंत्रियों को 15 दिनों में आवास खाली करना था। इसके बाद उन्हें किराया चुकाना होगा। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तिलक लेन के सरकारी आवास में रहते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, केजरीवाल ने केंद्र सरकार से गुजारिश कर रखी है कि यह आवास उनकी आईआरएस पत्नी के नाम अलॉट कर दिया जाए। वह अपने बच्चों की परीक्षा होने तक इसे खाली नहीं करना चाहते।
सूत्र बताते हैं कि अगर केंद्र सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी तो उन्हें भी बाजार दर से किराए का भुगतान करना पड़ेगा। पीडब्यूडी अधिकारियों के मुताबिक, पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ आईटीओ के समीप राउज एवेन्यू के सरकारी आवास रहते हैं। इसका मार्केट रेट से किराया 2.90 लाख रुपए प्रतिमाह है।
वहीं, पूर्व शहरी विकास मंत्री अरविन्दर सिंह लवली के शामनाथ मार्ग स्थित सरकारी आवास का किराया 3.50 लाख रुपए प्रतिमाह है। दोनों मंत्री इस समय विधायक हैं। इसके अलावा पूर्व शिक्षा मंत्री किरण वालिया का सत्य मार्ग, चाणक्यपुरी स्थित आवास को इस महीने की शुरुआत में छोड़ दिया था। इसका किराया 2.80 लाख है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के 3, मोती लाल नेहरू मार्ग स्थित आवास का किराया 3.25 लाख है। मुख्यमंत्री और उनकी एक मंत्री ने बेशक आवास खाली कर दिया है, लेकिन दोनों को उस समय तक किराया चुकाना पड़ेगा, जितने समय तक उन्होंने सरकारी आवास का इस्तेमाल किया है।