खुद को आम आदमी पार्टी का संस्थापक सदस्य बताने वाले तीन नेताओं ने पार्टी की कार्यशैली व संयोजक अरविंद केजरीवाल की मंशा पर सवालिया निशान लगाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल कांग्रेस के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। आरोप लगाने वाले राजेश गुप्ता ने खुद को पार्टी के व्यवस्था सेल, अश्वनी उपाध्याय को लीगल सेल व संजय को हरियाणा स्टेट के सदस्य के तौर पर जुड़े रहने की बात कही।
तीनों ने केजरीवाल से 11 सवाल भी पूछे हैं, जिस पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने की मांग की गई है।
सवाल केजरी से, लपेटे में कई दिग्गज
- फोर्ड फाउंडेशन की प्रमुख कविता रामदास के परिवार के सदस्यों जैसे रामदास, ललिता रामदास आदि को ‘आप’ की रणनीति समिति में क्यों रखा गया है?
- मनीष सिसोदिया को कबीर संस्था के लिए 2005 में 44 व 2006 में 32 लाख रुपये का चंदा फोर्ड फाउंडेशन व विदेशी संस्थाओं से मिला, जबकि संस्था 2007 में पंजीकृत हुई थी।
- क्या कभी मीरा सान्याल, योगेंद्र यादव, मेधा पाटकर के खिलाफ जांच कराई गई? मनीष सिसोदिया, मीरा सान्याल, योगेंद्र यादव व मेधा पाटकर ने फोर्ड फाउंडेशन तथा गल्फ व विदेशी देशों से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कितना चंदा प्राप्त किया?
केजरी की मुसीबत बढ़ाएंगे ये सवाल!
- AAP जिंदल व जीएमआर जैसी कंपनियों के खिलाफ क्यों नहीं बोलती? सिर्फ अंबानी पर हमला कर क्या वह भ्रष्टाचार के प्रति दोहरा रवैया अपना रही है?
- क्या यह सच है कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का सदस्य बनने के लिए केजरीवाल ने कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह, अजय माकन, रामबाबू शर्मा व आशीष तलवार (जो अब आप के सदस्य व दिल्ली प्रदेश इकाई के संयोजक हैं) से लॉबिंग कराई थी?
- वर्ष 2005 में AAP के पास सोनिया विहार जल संयंत्र में हुए 400 करोड़ रुपये घोटाले के दस्तावेज मौजूद थे। जिसे तत्कालीन शीला सरकार को अस्थिर करने के लिए अजय माकन, राम बाबू शर्मा व आशीष तलवार ने मुहैया कराया था, लेकिन इसमें एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई?
- पार्टी की सदस्य संतोष कोली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की?
जवाब देने को तैयार है AAP
चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी पर लगे इन आरोपों से पार्टी नेता तो चिंतित हैं ही, कार्यकर्ता भी थोड़े परेशान नजर आ रहे हैं।
हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि पार्टी पर जो भी आरोप लगाए गए हैं उनका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक पार्टी को उनकी ओर से कोई सवाल नहीं मिले हैं। जैसे ही सवाल उन्हें मिलते हैं पार्टी जवाब देगी।
लेकिन चुनाव के ऐन वक्त पर पार्टी के ही सदस्यों की ओर से ऐसे गंभीर आरोप लगाए जाने का नुकसान AAP को चुनाव में झेलना पड़ सकता है।