फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोजाना टीकरी बॉर्डर पर गीत संगीत, नुक्कड नाटक और ओजस्वी भाषणों के बीच गुजरता है किसानों का दिन

Tue, 22 Dec 2020 01:26 AM IST
Vikas Kumar आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
कृषि कानूनों का विरोध करते किसान - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का दिन रोजाना गीत संगीत, नुक्कड नाटक और ओजस्वी भाषणों के बीच गुजर रहा है। किसानों ने मंच को ही अपनी दुनिया बना ली है, जहां से महिला, बुजुर्ग और युवा अपने जज्बात साझा करते हैं। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करते हैं। पिछले 26 दिनों से यह सिलसिला लगातार जारी है। इस बीच मंच का आकार और मंच के सामने बैठे लोगों की संख्या निरंतर बढती जा रही है।

विज्ञापन


टीकरी बॉर्डर पर दो जगह इस तरह के मंच सजे हुए हैं। एक तो मुख्य बैरीकेडिंग के ठीक सामने लगा है। जिसे भारतीय किसान यूनियन ने सामूहिक रूप से स्थापित किया है। जिसे यहां का सार्वजनिक मंच भी माना जा सकता है। जबकि दूसरा मंच लगभग एक किलोमीटर पीछे भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) ने स्थापित किया है। बैरीकेडिंग के बगल वाले मंच पर फिल्मी दुनिया से जुड़े कलाकार, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और महिला कार्यकर्ताओं का जमावड़ा होता है। जबकि उगराहां के मंच पर वामपंथी संगठनों, छात्र संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लेकिन दोनों ही मंचों का मकसद तीनों कृषि कानूनों को वापस कराना है। 

गीत और नुक्कड नाटक से प्रस्तुत की जाती है अभिव्यक्ति
उगराहां के मंच पर पंजाब, हरियाणा व दिल्ली के युवा कलाकार और वामपंथी महिला संगठन सरकार और पूंजीपतियों को आईना दिखाने वाले नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करते हैं। मंच के सामने सबसे आगे विशेष हरे व पीली पोशाक में महिलाएं बैठती हैं। पीछे युवाओ और बुजुर्गों के बैठने की जगह निश्चित होती है। यहां डफली बजाकर आजादी के गीत गाए जाते हैं। संघर्ष जारी रखने की कसमें खाई जाती हैं। यहां कंवर ग्रेवाल, हार्फ चीमा, सोनिया मान जैसे कलाकार पहुंचकर प्रस्तुतियां देते हैं। 
विज्ञापन


महिला संगठन की नेता कुलदीप कौर कुसा अपने ओजस्वी भाषणों से किसानों को ढांढस बंधाती हैं। डॉक्टर अरुण मित्रा और सुखवंत वल्टोहा स्वास्थ्य सुविधाएं चुस्त दुरुस्त कराने का संकल्प लेते हैं। अमरजीत सदोके दिनभर यहां मंच का संचालक करते हैं। यह सिलसिला दिनबदिन आगे बढ़ रहा है। उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां की मांनें तो जबतक दूसरी दुनिया में बैठी सरकार के कानों तक किसानों की बात नहीं पहुंच जाती, यह सिलसिला जारी रहेगा।

विज्ञापन

किसानों ने दिल्ली मेरठ हाईवे जाम किया, घंटो परेशान रहे लोग

गाजीपुर बॉर्डर पर धरना स्थल पर बैठे किसानों ने सोमवार दोपहर को दिल्ली मेरठ हाईवे जाम कर दिया। इससे दिल्ली से यूपी की ओर जाने वाला यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

करीब 3 घंटे तक यही स्थिति रही। पुलिस प्रशासन के आश्वासन के बाद ही किसान हाईवे से हटे। किसान संगठनों ने शनिवार को घोषणा कि थी कि उनके साथियों को दिल्ली आने से रोका जा रहा है। ऐसे ही चलता रहा तो वे सोमवार को हाईवे की सभी लेन जाम कर देंगे। इसी कड़ी में किसानों ने यह कदम उठाया था। 

दोपहर करीब 4 बजे कई किसान केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए गाजीपुर बॉर्डर के पास दिल्ली मेरठ हाईवे पर पहुंच गए। उन्होंने हाईवे की सभी लेन को जाम कर दिया। किसानों के आंदोलन के चलते यूपी से दिल्ली की ओर जाने वाला रास्ता पहले ही बंद पड़ा है। दूसरे रास्ते के भी बंद हो जाने से यूपी गेट के आसपास के सभी इलाकों में भीषण जाम लग गया।  

आलम यह था कि गाजीपुर बॉर्डर से लेकर मयूर विहार कट तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई। हाईवे बंद होने के कारण दिल्ली से आ रहे लोगों को आनंद विहार के रास्ते यूपी में प्रवेश करवाया जा रहा था। इसके चलते हैं आनंद विहार पर वाहनों का दबाव बढ़ गया और देखते देखते वहां भी भीषण जाम लग गया। करीब तीन घंटे तक वाहन कतार में खड़े रहे। 6 बजे किसानों ने पुलिस प्रशासन के समझाने के बाद रास्ता खोला।

 किसान संगठनों ने शनिवार को घोषणा की थी कि अगर किसानों को दिल्ली आने से रोका जाएगा तो वह आने वाले दिनों में दिल्ली मेरठ हाईवे की सभी लेन को बंद कर देंगे ।  सुबह किसान नेताओं को जानकारी मिली कि उनके साथियों को कई जगह पर रोका जा रहा है और उनके वाहनों को भी जब्त किया जा रहा है।

इस मामले में किसान नेताओं प्रशासन से बातचीत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। इसके बाद ही किसानों ने हाईवे को पूरी तरह से जाम करने का फैसला लिया। प्रशासन ने किसानों को आश्वासन दिया कि किसी भी किसान को धरना स्थलों पर आने से रोका नहीं जाएगा। इसके बाद किसानों ने रास्ता खोला। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें