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सम-विषम: धमकाकर बसें मांग रही सरकार, कोर्ट जाएंगे स्कूल

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सम-विषम फॉर्मूला लागू करने के साथ यात्रियों के लिए सड़क पर बसों की संख्या बढ़ाने की एक और कोशिश पर सरकार को झटका लगा है। सरकार कांट्रेक्ट कैरिज परमिट से चलने वाली स्कूल बसों को सड़क पर उतारना चाहती है, लेकिन निजी स्कूल एसोसिएशन इसके विरोध में उतर आए हैं।
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स्कूल शिक्षा निदेशालय के उस आदेश से नाराज हैं, जिसमें उन्हें चेतावनी भरे लहजे में बसों का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा गया है। स्कूल एसोसिएशन ने कहा कि हम सरकार के इस रवैये के खिलाफ कोर्ट भी जा सकते हैं।

दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन के मुताबिक, सरकार दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पब्लिक स्कूलों को धमका कर उनकी बसें लेने की कोशिश कर रही है।
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स्कूलों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है

उनके मुताबिक, शिक्षा निदेशालय ने 21 दिसंबर को आदेश जारी कर बसों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर स्कूलों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। उसी आदेश में उन स्कूलों को (जिसके पास बसें हैं) बसों का कांट्रेक्ट कैरिज परमिट, रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, बीमा पॉलिसी और बसों की फिटनेस प्रमाण पत्र लेकर उप शिक्षा निदेशालय में आने की हिदायत दी है।

स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि बसों के ड्राइवर व हेल्पर को भी जबरदस्ती 1 से 15 जनवरी तक बसों को चलाने के लिए रोका जा रहा है, जिसके लिए स्कूलों की छुट्टियों की तिथि बदलने का भी तुगलकी आदेश जारी किया गया।

स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि स्कूलों में प्री बोर्ड की परीक्षाएं होनी हैं। यही नहीं स्कूल बसों में यात्रियों की जान को भी खतरा है। पब्लिक स्कूलों की बसों में आगे की तरफ  एक ही दरवाजा होता है, अगर कोई अप्रिय घटना हुई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।'
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