-दिल्ली सरकार जल्द ही ईवी पॉलिसी 2.0 को करेगी अधिसूचित, केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के साथ जोड़कर किया जाएगा लागू
-राजधानी में हर 5 किमी पर बनाए जाएंगे फास्ट चार्जिंग स्टेशन, चार्जिंग प्वाइंट 8,998 से बढ़ाकर 16,070 करने का है लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली सरकार जल्द ही ईवी पॉलिसी 2.0 को अधिसूचित करने जा रही है। जिसे केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के साथ जोड़कर लागू किया जाएगा। इस नई नीति का फोकस सिर्फ सब्सिडी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सार्वजनिक बस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बनाने और शहर में चार्जिंग नेटवर्क की कमी दूर करने पर रहेगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक 47 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड पर हर पांच किलोमीटर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है। इसका मकसद रेंज एंग्जायटी यानी बीच रास्ते में बैटरी खत्म होने के डर को कम करना है। वर्तमान में दिल्ली में 8,998 ईवी चार्जिंग प्वाइंट हैं, जबकि आवश्यकता 36,177 की बताई गई है। सरकार ने इस साल के अंत तक इसे बढ़ाकर 16,070 करने का लक्ष्य रखा है। नई नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य दिल्ली के सार्वजनिक बस बेड़े को पूरी तरह इलेक्ट्रिक करना है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक 6,000 ई-बसें सड़कों पर उतारने का है। इसके बाद 7,500 बसें अगले वर्ष मार्च तक, 10,400 बसें मार्च 2028 तक और 14,000 ई-बसें निर्धारित समय सीमा तक शामिल करने की योजना है। यह कदम न सिर्फ प्रदूषण कम करने बल्कि परिचालन लागत घटाने की रणनीति का भी हिस्सा है। केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत दोपहिया और तीनपहिया वाहनों पर बैटरी क्षमता के आधार पर सब्सिडी दी जाती है। दोपहिया पर 5,000 रुपये प्रति किलोवॉट घंटा (अधिकतम 10,000 रुपये) और तीनपहिया पर 25,000 से 50,000 रुपये तक का प्रावधान है। दिल्ली सरकार की मौजूदा योजना के तहत दोपहिया पर 5,000 रुपये प्रति किलोवॉट घंटा (अधिकतम 30,000 रुपये) और तीनपहिया पर 30,000 रुपये की फ्लैट सब्सिडी मिलती है। अधिकारियों के अनुसार, नई नीति में केंद्र और राज्य की योजनाओं को जोड़कर खरीदारों को अधिकतम आर्थिक लाभ देने की तैयारी है।
स्क्रैपिंग और बैटरी निस्तारण पर भी जोर
ईवी पॉलिसी 2.0 में पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को हटाने के लिए स्क्रैपिंग प्रोत्साहन देने, पर्याप्त ईवी आपूर्ति सुनिश्चित करने और इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने का भी प्रावधान होगा। सरकार का मानना है कि नई नीति के लागू होने से दिल्ली में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को व्यापक गति मिलेगी।