शिक्षा मंत्रालय के दखल से देश की 10 से अधिक राज्य सरकारें इंजीनियरिंग डिग्री कॉलेजों में तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता संवर्धन कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी) के तहत नियुक्त सहायक प्रोफेसर की सेवाओं को बहाल करने की तैयारी कर रही हैं। उत्तराखंड, बिहार, जम्मू-कश्मीर के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इन असिस्टेंट प्रोफेसर का कार्यकाल आगे बढ़ाने की योजना बना ली है। जबकि अन्य राज्य सरकारों से शिक्षा मंत्रालय बात कर रहा है। इंजीनियरिंग डिग्री कॉलेजों के इन शिक्षकों की 30 सितंबर को सेवाएं समाप्त हो गई हैं। इसी को लेकर यह प्रोफेसर पिछले 15 दिनों से मंत्रालय के बाहर अपनी मांगों की पूर्ति के लिए धरने पर बैठे थे।
भारत सरकार ने 2017 में तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता संवर्धन कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी) के तहत देश की तकनीकी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार के लिए विश्व बैंक समर्थित परियोजना के रूप में क्रियान्वित की थी। इसके तहत आईआईटी, एनआईटी से एमटेक, पीएचडी डिग्रीधारक और गेट क्वालिफाई लगभग 1400 उम्मीदवारों को राज्यों के ग्रामीण व पिछले इलाकों के इंजीनियरिंग डिग्री कॉलेज में नियुक्ति किया गया था। इसमें तीन साल तक वेतन का पैसा केंद्र सरकार की ओर से दिया गया था।
हालांकि 2020 के बाद प्रदर्शन के आधार पर राज्यों ने आगे इनकी सेवाओं को आगे विस्तार देना था। यह योजना 2020 में समाप्त होवरही थी। लेकिन कोरोना के चलते केंद्र ने 2021 तक राहत दी थी। जोकि अब 30सितंबर को समाप्त हो गई है। एक साल कार्यकाल विस्तार कर दिया था। हालांकि आगे की सेवाओं के लिए राज्यों को उनका वेतन खुद देना था।
5 सितंबर से शिक्षा मंत्रालय के बाहर सेवा विस्तार की मांग को लेकर धरना :
यह सभी शिक्षक 5 सितंबर से शिक्षा मंत्रालय के बाहर सेवा विस्तार की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने इनके प्रतिनिधिमंडल से बात करके राज्य सरकारों से बात करने की अपील की थी। लेकिन असम, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों के डिग्री इंजीनियरिंग कॉलेजों के यह एक हजार से अधिक सहायक प्रोफेसर सेवाएं समाप्त करने का विरोध जता रहे थे। इसी के चलते शिक्षा मंत्रालय ने संबंधित राज्य सरकारों से बात को और 2017 के समझौते की याद दिलवाई। क्योंकि वर्ल्ड बैंक की यह योजना अब समाप्त हो चुकी है, इसलिए आगे का फैसला राज्य सरकारों को लेना है।
मंत्रालय के दखल से कुछ राज्यों ने दी राहत:
शिक्षा मंत्रालय के दखल से उत्तराखंड जम्मू-कश्मीर व बिहार ने तो राहत दे दी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश भी राहत की तैयारी कर रहा है। वही मंत्रालय के दखल से अन्य राज्य अभी विचार-विमर्श कर रहे हैं।