जामिया में छात्रों का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के अधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जामिया विश्वविद्यालय में हुई पुलिसिया कार्रवाई के दौरान किसी भी छात्र को पुलिस की गोली नहीं लगी है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिस फायरिंग में कई युवक घायल हुए हैं। गृह मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि ये आरोप बेबुनियाद हैं। दो युवक जो कि सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं, वे किस चीज से घायल हुए हैं, इसकी जांच की जा रही है।
यह तय है कि उन्हें पुलिस की गोली नहीं लगी है। एक युवक जो कि होली फेमिली अस्पताल में भर्ती है, उसे छुट्टी दे दी गई है। यहां भी बता दें कि उस युवक को भी पुलिस की गोली नहीं लगी है। डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वह युवक घायल था, लेकिन उसे बुलेट नहीं लगी थी। हो सकता है कि किसी दूसरे कारण से वह घायल हुआ हो।
दिल्ली पुलिस को अंदेशा है कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दंगे भड़काने की बड़ी साजिश हो रही है। जामिया के रिहायशी इलाके में खाली कारतूस मिले हैं। केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अब हालात सामान्य हैं। इन दो विश्वविद्यालयों को छोड़कर देश की सभी 42 सेंट्रल यूनिवर्सिटी में नियमित कामकाज हो रहा है।
एएमयू और जामिया को छोड़कर सारे केंद्रीय विश्वविद्यालय का शिक्षण सत्र सामान्य रूप से चल रहा है। परीक्षाएं और प्रेक्टिकल तय समय पर ही होंगे। केवल एएमयू और जामिया में परीक्षाओं का शेड्यूल बदला जाएगा। जामिया की घटना में जो दस लोग गिरफ्तार हुए हैं, उनमें से कोई भी जामिया का छात्र नहीं है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जामिया के पास से खाली कारतूस मिले हैं।इस मामले की गहराई से जांच चल रही है।दिल्ली पुलिस की ओर से पहली गोली नहीं चलाई गई है। इस बात का पता लगाया जा रहा है कि दंगे भड़काने के पीछे कोई विदेशी साजिश तो नहीं रची जा रही।