जिला अस्पताल में सोमवार को इलाज के दौरान 30 वर्षीय युवक की मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि इमरजेंसी के डॉक्टर ने हड़बड़ी में आकर गलत इंजेक्शन लगा दिया, जिस वजह से मरीज की मौत हुई।
इस पर अस्पताल में हंगामा भी हुआ। हालत ये हो गई कि अस्पताल प्रबंधक को पुलिस को बुलाना पड़ा और मामले को शांत करवाना पड़ा। युवक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।पीड़ित पिता राजपाल ने बताया कि शनिवार को उनके बेटे संदीप को सांस लेने में परेशानी हो रही थी।
उसे इमरजेंसी में लेकर आए। डॉक्टर ने संदीप को देखकर रविवार के दिन ओपीडी में दिखाने को बोल दिया। सोमवार को दोबारा से अस्पताल में इलाज कराने के लिए लेकर आए। सुबह 7 बजे अस्पताल की इमरजेंसी में आ गए थे। इमरजेंसी के डॉक्टर ने कुछ नहीं किया। उसके बाद हम 8.30 बजे ओपीडी में लेकर गए।
ओपीडी और इमरजेंसी के बीच भटकता रहा मरीज
मृत मरीज के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
जहां पर पहले संदीप को 108 में बैठे डॉक्टर को दिखाया, फिर 107 में दिखाया। वहां के डॉक्टर ने एक्स- रे करवाया। एक्स- रे दिखाने पर डॉक्टर ने संदीप को टीबी की बीमारी बताई और दिल्ली के अस्पताल ले जाने के लिए बोला दिया।
लेकिन उसकी हालत गंभीर थी, इसलिए जिला अस्पताल में भर्ती करने का निवेदन किया, लेकिन डॉक्टर ने मना कर दिया। उसके बाद दोबारा से इमरजेंसी में आए। वहां डॉक्टर को पूरी बात बताई, तब जाकर डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट कराने को बोला।
ब्लड टेस्ट के दौरान ही संदीप बेहोश हो गया और हम लोग उसे इमरजेंसी में लेकर आए। जहां पर डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाया और उसकी मौत हो गई। सीएमएस डॉ एन एम माथुर ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर थी। ओपीडी में ही उसको खून की उल्टी हुई थी। इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।