फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'दिल्ली में बिजली के घटे दामों ने साबित की तीन बातें'

विज्ञापन
विज्ञापन
दिल्ली में चुनावी मौसम आते ही बिजली के भाव चर्चा में आ ही जाते हैं। बिजली कंपनियों की मांग पर बृहस्पतिवार को दिल्ली विद्युत विनियामक बोर्ड (डीईआरसी) ने पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट चार्ज (पीपीएसी) को बढ़ाने की घोषणा की थी। इससे दिल्ली में बिजली की कीमत में अधिकतम सात फीसदी तक का इजाफा होने का खतरा पैदा हो गया था।
विज्ञापन


हालांकि शुक्रवार को दोपहर तक यह खबर आई कि डीईआरसी ने बढ़ी हुई दरों को वापस लेने का फैसला किया है। दिल्ली के एलजी नजीब जंग ने इस बारे में कहा कि उन्हें इस तरह का एसएमएस आया है कि डीईआरसी ने बिजली की बढ़ी हुई दरों को वापस ले लिया है।

बिजली के बढ़े हुए दामों को वापस लेने के फैसले पर सफाई देते हुए डीईआरसी ने कहा है कि कैलकुलेशन में कुछ गड़बड़ी हो गई थी जिसके कारण पीपीएसी बढ़ा दी गई थी।
विज्ञापन


हालांकि इन सबके बीच दिल्ली की जनता के लिए अच्छी खबर यह है कि उन्हें बिजली की बढ़ी दरों के भार से फिलहाल छुटकारा मिल गया है। बिजली की बढ़ी दरों का फैसला वापस लेने के साथ ही दिल्ली में सियासत का खेल शुरु हो गया।
Trending Videos

आप ने तुरंत चला चुनावी दांव

डीईआरसी के फैसले के तुरंत बाद ही आम आदमी पार्टी ने इस मौके का फायदा उठाया और यह कहा कि बिजली की बढ़ी दरों को वापस लेने का फैसला असल में उनके दबाव में लिया गया है।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष ने मीडिया से कहा कि आम आदमी पार्टी शुरु से बिजली की बढ़ी दरों के खिलाफ रही है और उसके दबाव के चलते ही डीईआरसी को अपना फैसला वापस लेने को मजबूर होना पड़ा।

कुछ घंटो बाद ही आम आदमी पार्टी ने एक औपचारिक प्रेस कांफ्रेंस की जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव ने बढ़ी हुई दरों और वापस लेने के फैसले पर भारतीय जनता पार्टी को घेरे में लिया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से तीन बातें साबित होती हैं।
विज्ञापन

इस फैसले से साबित हुई तीन बातें

पहली कि डीईआरसी कोई स्वायत्त संस्‍था नहीं है और इसके सारे फैसले राजनीतिक दबाव में लिए जाते हैं। जबकि शुरु से ही कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी यह दिखावा करती रही है कि डीईआरसी एक स्वायत्त संस्‍था है जिसके निर्णय पर सरकार का कोई प्रभाव नहीं होता।

दूसरी- चुनाव के ठीक पहले ऐसा करके भारतीय जनता पार्टी ने यह जाहिर कर दिया है कि उसे जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है। यही कारण है कि दाम बढ़ाए जाने की घोषणा के बाद भी पार्टी ने न तो विरोध किया और न ही कोई बयान दिया।

तीसरी- अगर आम आदमी पार्टी ने इस फैसले के खिलाफ आवाज न उठाई होती तो दिल्ली की जनता को बढ़े हुए दाम ‌देने के लिए मजबूर होना पड़ता।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें