पश्चिमी दिल्लीः सबसे कम पढ़ने वाले हैं सांसद
महाबल मिश्रा (कांग्रेस)
शैक्षिक योग्यता : हायर सेकेंडरी। मार्च 1997 में नगर निगम के पार्षद बने, इसके डेढ़ साल बाद 1998 में दिल्ली विधानसभा के विधायक बने। इसके बाद 2003 और 2008 में भी विधायक चुने गए। 2009 में पश्चिमी दिल्ली से सांसद बने। प्रदेश कांग्रेस में तेजतर्रार पूर्वांचली नेता के रूप में पहचान है। इसी के चलते पूर्वांचलियों को लुभाने के लिए उन्हें एक बार फिर सांसद का टिकट दिया गया है।
प्रवेश वर्मा (भाजपा)
शैक्षणिक योग्यता: एमबीए। पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा का पुत्र होने केचलते राजनीति में प्रवेश मिला। साल 2009 में प्रदेश भाजपा में सचिव बने, इसी साल लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने पर पार्टी ने उन्हें महासचिव बना दिया। दिसंबर 2013 में विधानसभा चुनाव में मेहरौली से विधायक चुने गए। इस बार पश्चिमी दिल्ली से लोकसभा का टिकट मिला। भाजपा ने जाट मतदाताओं को लुभाने के लिए इन पर दांव खेला।
जरनैल सिंह (आप)
शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएट। जरनैल सिंह पत्रकार रह चुके हैं। सिख दंगा मामले में केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम पर जूता फेंकने पर चर्चा में आए थे। उसके बाद पत्रकारिता से बाहर हुए और फिर समाज सेवा में लग गए। उस समय भी चुनाव लड़ने का ऑफर मिला लेकिन तब राजनीति से दूरी बनाए रखी। अब ‘आप’ के टिकट से पश्चिमी दिल्ली सीट से चुनाव मैदान में हैं।
उत्तर पूर्वीः एक प्रोफेसर तो एक एक्टर
जयप्रकाश अग्रवाल (कांग्रेस)
शैक्षिक योग्यता : बीए। दिल्ली के पहले डिप्टी मेयर रामचरण अग्रवाल के बेटे हैं। वर्ष 1983 में नगर निगम में पार्षद का चुनाव लड़कर राजनीति की शुरुआत की। चुनाव जीतने के बाद डिप्टी मेयर व स्थाई समिति के अध्यक्ष बने। वर्ष 1984 में सांसद का चुनाव जीते। इसके बाद 1989, 1996 व 2009 में फिर लोकसभा चुनाव जीते। वर्ष 2005 में दिल्ली से राज्यसभा सदस्य बने। वर्ष 1991, 1998 व 1999 में लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने वर्ष 2007 से 2013 तक प्रदेश इकाई के प्रमुख की जिम्मेदारी दी।
मनोज तिवारी (भाजपा)
शैक्षिक योग्यता : एमपी एड। पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मनोज तिवारी पहली बार चुनाव लड़े। इन्हें भाजपा के दिग्गज नेता योगी आदित्यनाथ के मुकाबले उतारा गया था। आदित्यनाथ से चुनाव हारने के बाद तिवारी ने दिल्ली की तरफ रुख किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय भाजपा में शामिल हुए और पूर्वांचल बहुल इलाकों में जमकर प्रचार किया।
प्रो. आनंद कुमार (आप)
शिक्षा: पीएचडी। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर आनंद कुमार की शिक्षा विदेश में हुई है। वह सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ाते थे। इस पर उन्होंने बहुत काम किया है। वह इसे लेकर समसामयिक मुद्दों पर लगातार कॉलम भी लिखते हैं। सामाजिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी रखने वाले प्रोफेसर आनंद कुमार अब आम आदमी के टिकट से चुनावी मैदान में हैं।
उत्तर पश्चिमी बड़ा तकनीकी मामला है
कृष्णा तीरथ (कांग्रेस)
शैक्षिक योग्यता : बीए, बीएड। वर्ष 1991 में लोकसभा चुनाव में हार के साथ राजनीति की शुरुआत की। वर्ष 1993, 1998 व 2003 में विधायक चुनी गईं। वह दिल्ली सरकार में मंत्री के अलावा दिल्ली विधानसभा की उपाध्यक्ष बनीं। वर्ष 2004 व 2009 में सांसद चुनी गईं। इस दौरान वह केंद्र्र सरकार में मंत्री भी बनीं।
उदित राज (भाजपा)
शैक्षिक योग्यता : एमए, एलएलबी। इंडियन जस्टिस पार्टी नाम से राजनीतिक दल का गठन किया। दलितों की राजनीति वे शुरू से करते रहे। कुछ दिनों पहले डॉ. उदित राज भाजपा में शामिल हुए हैं और लोकसभा का चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ रहे हैं।
राखी बिडलान (आप)
शैक्षिक योग्यता: मास्टर इन मास कम्युनिकेशन। शुरू के दिनों में अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़ी रहीं। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने राखी बिडलान को मंगोलपुरी से टिकट दिया। कांग्रेस के कद्दावर मंत्री राजकुमार चौहान को हराकर विधानसभा पहुंचीं। दिल्ली सरकार में समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री भी बनाया गया। सुर्खियों में रहने वाली राखी को महेन्द्र सिंह के नाम वापस लेने पर टिकट दिया गया। पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं।
पूर्वी दिल्ली: यहां हैं एक्चुअल कंपटीटर
नाम: संदीप दीक्षित (कांग्रेस)
शैक्षिक योग्यता : एमए। कांग्रेस के दिग्गज नेता उमाशंकर दीक्षित के पौत्र हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र होेने के चलते वर्ष 2004 में सांसद का टिकट मिला और भाजपा के तीन बार से सांसद बन रहे लालबिहारी तिवारी को हरा दिया। वर्ष 1998 में तिवारी ने शीला को हराया था। वर्ष 2009 में एक बार फिर सांसद का चुनाव जीतने में सफल हुए। फिलहाल कांग्रेस प्रवक्ता की भूमिका निभा रहे हैं।
महेश गिरी (भाजपा)
राजनीतिक सफर: गिरी शुरू में तो आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े रहे। बाद में वे काफी दिनों तक अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़ गए। करीब छह महीना पहले गिरी राजनीतिक पार्टी भाजपा से जुड़े। पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से गिरी पहली बार चुनावी मैदान में हैं।
राजमोहन गांधी (आप)
शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएशन। राजमोहन गांधी की सबसे बड़ी पहचान नाम के साथ जुड़ा गांधी टाइटल है। वह महात्मा गांधी के पौत्र हैं। आम आदमी पार्टी ने उन्हें पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट से संदीप दीक्षित के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा है। गांधी रिचर्स प्रोफेसर रह चुके हैं। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की लड़ाई लड़ी। इस दौरान उन्होंने हिम्मत नाम से वीकली पत्रिका भी निकाली। वह महात्मा गांधी का बायोग्राफी भी लिख चुके हैं।
दक्षिणी दिल्लीः दसवीं पास का मुकाबला आर्मी कर्नल से
रमेश कुमार (कांग्रेस)
शैक्षिक योग्यता : दसवीं। दिल्ली कांग्रेस के तेज तर्रार नेता सज्जन कुमार के भाई होने के चलते राजनीति में प्रवेेश मिला। वर्ष 1998 में विधायक का चुनाव जीते, लेकिन 2003 में विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। वर्ष 2009 में सिख विरोेधी दंगों के चलते सज्जन कुमार से टिकट वापस लेने के बाद उन्हें मिला। इस चुनाव में भाई के चलते संसद में पहुंचने में कामयाब हुए।
रमेश बिधूड़ी (भाजपा)
शैक्षिक योग्यता : बी कॉम, एलएलबी। वर्ष 1993 में विधायक का चुनाव लड़ने के साथ राजनीति में कदम रखा। मगर किस्मत ने साथ नहीं दिया और 1993 व 1998 में लगातार दो बार विधायक का चुनाव हारे। मगर 2003, 2008 व 2013 में विधाधक का चुनाव जीतने में सफल रहे। वह 2009 में लोकसभा का चुनाव भी लड़े, लेकिन हार गए। वह प्रदेश भाजपा में उपाध्यक्ष रहे चुके हैं। अब कई वर्ष से महामंत्री हैं।
कर्नल देवेंद्र सहरावत (आप)
शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएशन। आर्मी में कर्नल के पद से रिटायर होने के बाद समाज सेवा में काम करते थे। इसी दौरान आंदोलन से जुड़े फिर आम आदमी पार्टी ज्वाइन करके दिल्ली विधानसभा चुनाव में बिजवासन सीट से चुनाव लड़े। वे दूसरे स्थान पर रहे। पार्टी ने इन पर फिर भरोसा जताते हुए दक्षिणी दिल्ली सीट से चुनाव मैदान में उतारा है।
चांदनी चौकः पढ़ाई में यहां वाले अव्वल
कपिल सिब्बल (कांग्रेस)
शैक्षिक योग्यता : एलएलएम। वर्षों तक कांग्रेस के प्रवक्ता रहने के बाद वर्ष 1996 में लोकसभा का टिकट मिला, लेकिन भाजपा की सुषमा स्वराज से हारने के बाद कई वर्षों तक चुनाव नहीं लड़े। वर्ष 2004 में एक बार फिर सांसद का चुनाव लड़ा और टीवी कलाकार भाजपा उम्मीदवार स्मृति इरानी को हराकर संसद में पहुंचे। वर्ष 2009 में फिर सांसद बने। दोनों बार यूपीए सरकार में अनेक मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री बने।
डॉ. हर्षवर्धन (भाजपा)
शैक्षिक योग्यता : एबीबीएस, एमएस। वर्ष 1993 में दिल्ली विधायक का चुनाव जीतकर राजनीति की शुरुआत की। इस दौरान पांच वर्ष तक दिल्ली सरकार में मंत्री रहे। इसके बाद वर्ष 1998, 2003, 2008 व 2013 में भी विधायक बने। भाजपा ने 2013 में विधानसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी दी। वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व तीन बार प्रदेश अध्यक्ष भी बने है। इसके अलावा भाजपा की चुनाव समिति के सदस्य हैं। कई प्रदेशों के प्रभारी की भी भूमिका निभाई है।
आशुतोष (आप)
शिक्षा: एम.फिल। आशुतोष तेज तर्रार पत्रकार रहे हैं। टीवी पत्रकारिता में जाना पहचाना यह नाम कुछ समय पहले ही पत्रकारिता छोड़ राजनीति में आया है। आशुतोष अन्ना के आंदोलन से जुड़े हुए थे। लेकिन खुलकर कभी सामने नहीं आए। वह आंदोलन पर किताब भी लिख चुके हैं। दिल्ली में ‘आप’ की सरकार बनने के बाद उन्होंने आधिकारिक रूप से पार्टी ज्वाइन कर ली। वे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं।