केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि देश में 80 फीसदी उच्च शिक्षण संस्थानों ने कभी पेटेंट के लिए आवेदन ही नहीं किया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए आवेदन करने की प्रकिया और प्रणाली की जानकारी न होने के चलते वे पिछड़ रहे हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर महर्षि भारद्वाज बौद्धिक संपदा शिक्षा अभियान के उद्घाटन मौके कहा कि दस हजार पेटेंट का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2017-18 में देश में लगभग 47,800 पेटेंट दायर किए गए थे। इसमें से लगभग 13,000 पेटेंट को मंजूरी मिली थी। जबकि वर्ष 2019- 20 में 24,936 पेटेंट को मंजूरी मिली थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "भारत रत्न डॉ कलाम ‘नवप्रवर्तन’ के प्रबल पक्षधर रहे हैं। ऐसे में उनकी जन्मदिवस को ‘नेशनल इनोवेशन डे’ के रूप में मनाया जाना और महर्षि भारद्वाज के नाम पर बौद्धिक संपदा अभियान प्रारंभ करना भारत की महान संस्कृति, सभ्यता को दर्शाता है। प्रतिष्ठित अभियान का नाम "विमान शास्त्र" के रचयिता महर्षि भारद्वाज के नाम पर रखा है। दरअसल वे एक महान आविष्कारक थे और इस पहल को उनके प्रयासों के लिए समर्पित करना है। उच्च शिक्षण संस्थानों के शोधकर्ताओं को अपने आविष्कारों के लिए पेटेंट दायर करने की शिक्षा देने के लिए ही ‘महर्षि भारद्वाज बौद्धिक सम्पदा शिक्षा अभियान' शुरू किया गया है। इसमें आविष्कारों की सुरक्षा, प्रबंधन, दोहन और नवप्रवर्तन का लाभ उठाने के लिए इन्हें संरक्षित करने के साथ पेटेंट भी कराया जाएगा।
पांच हजार संस्थानों में आईआईसी की स्थापना होगीः
उन्होंने बताया कि अभी तक इंस्टिट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के तहत 1678 उच्च शिक्षण संस्थाओं में आईआईसी की स्थापना की गई है। हालांकि इसकी संख्या बढ़ाकर अब पांच हजार की जाएगी। उन्होनें कहा कि नई शिक्षा नीति में इस दिशा में कदम उठाया गया है। नीति के माध्यम से स्किल तथा वोकेशनल ट्रेनिंग के जरिए हम लगातार अपडेट और अपग्रेड करते रहने की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। इसमें 'जय अनुसंधान' के विजन को आगे बढ़ाते हुए एनआरएफ की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में एचईसीआई तथा एनईटीएफ जैसी बॉडी का गठन भी होगा।