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दिल्ली जल बोर्ड घोटाले के बाद ईडी का दावा: घूस का पैसा चुनावी फंड के रूप में दिया गया; 'आप' ने दी सफाई

Wed, 07 Feb 2024 07:34 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में हुई कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को आरोप लगाते हुए कहा कि डीजेबी में हुए भ्रष्टाचार का पैसा आम आदमी पार्टी को चुनावी चंदे के रूप में दिया गया। हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस आरोप से इनकार किया है।
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जांच में ईडी को मिले सबूत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बीते मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं के यहां छापा मारा। ईडी की टीम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव के घर भी गई। दिल्ली समेत कई ठिकानों पर छापा मारा। छापेमारी के बाद अब ईडी ने जब्त और बरामद किए सबूतों की जानकारी दी। 

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ईडी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है आप
पीटीआई के मुताबिक,
 दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में हुई कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को आरोप लगाते हुए कहा कि डीजेबी में हुए भ्रष्टाचार का पैसा आम आदमी पार्टी को चुनावी चंदे के रूप में दिया गया। हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस आरोप से इनकार किया है। पार्टी की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया है कि हमें बदनाम करने के लिए एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

आगे कहा कि फिर कोर्ट में एक भी मामला साबित नहीं हो सका है। इससे पता चलता है कि उनका एकमात्र उद्देश्य हर दिन मीडिया में सनसनी पैदा करके सीएम अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को बदनाम करना है। बिना किसी सबूत के एक बार फिर आम आदमी पार्टी का नाम लेकर ईडी ने साबित कर दिया है कि यह भाजपा के मुखपत्र के अलावा और कुछ नहीं है। हम आप को बदनाम करने के लिए ईडी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
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छापेमारी के बाद ईडी ने दी जानकारी
दिल्ली जल बोर्ड भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली-वाराणसी और चंडीगढ़ में कई जगहों पर छापेमारी की थी। सर्च अभियान के दौरान ईडी ने कई सामान जब्त किया है। ईडी ने जानकारी देते हुए बताया कि कई दस्तावेज, डिजिटल सबूत और 1.97 करोड़ रुपये बरामद हुए हैं। वहीं चार लाख रुपये की विदेशी करेंसी भी जब्त की गई है। 
 
आतिशी ने ईडी की जांच पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री के पीएस और सांसद एनडी गुप्ता के घर मंगलवार को हुई ईडी की छापेमारी पर आम आदमी पार्टी ने कई सवाल खड़े किए है। आप की वरिष्ठ नेता आतिशी ने कहा कि ईडी का असल चेहरा अब देश के सामने बेनकाब हो गया है। ईडी ने 16 घंटे छापेमारी की, लेकिन उसने अंत तक यह नहीं बताया कि किस केस में छापेमारी की है। ईडी ने न तो उनसे पूछताछ की, न घर की तलाशी ली और न तो अपने पंचनामे में ही किसी केस का जिक्र किया है।

सीएम केजरीवाल के खिलाफ मीडिया में माहौल
आतिशी ने पार्टी मुख्यालय में बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईडी की छापेमारी का मूल मकसद मीडिया में केवल माहौल बनाकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बदनाम करना था। इसके अलावा ईडी ने अब सारे दिखावे को खत्म कर साफ कर दिया है कि यह जांच और समन केवल अरविंद केजरीवाल को खत्म करने की एक साजिश है। 

न तलाशी ली और न ही मामला बताया
उन्होंने कहा कि नियमत ईडी जब भी छापा मारने आती है, तो कुछ सर्च और सीजर होते हैं। सर्च और सीजर के डॉक्यूमेंट पर यह स्पष्ट लिखा होता है कि कौन सा केस है या फिर ईसीआईआर (ईडी की भाषा में एफआईआर) नंबर क्या है? 

केस की डिटेल नहीं बताई
वहीं ईडी के पंचनामे में कहीं भी नहीं लिखा है कि वो किस केस की जांच करने आई हैं। इसमें न ईसीआईआर नंबर दर्ज है और न तो उसकी कोई डिटेल ही है। इसी तरह ईडी यह भी बताने को तैयार नहीं है कि वो छापा किस मामले में मारने आई थी। उन्होंने कहा कि भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केवल अरविंद केजरीवाल चुनौती दे सकते हैं और वह छापेमारी, समन और जेल जाने से नहीं डरते हैं।

आतिशी अपनी सरकार के भ्रष्टाचार की लीपापोती के बजाए काम पर ध्यान दें: भाजपा
प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी को अपने विभागों पर ध्यान देना चाहिए, मगर वह रोजाना अपनी सरकार के भ्रष्टाचार की लीपापोती पर समय लगाती रहती है। अगर वह उतना समय अपने दिल्ली जल बोर्ड एवं लोक निर्माण विभाग पर दें तो दिल्ली की जलापूर्ति एवं सीवर निकासी व्यवस्था सुधरेगी और दिल्ली की सड़कों पर विकास भी दिखेगा।
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वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि केवल आतिशी ही नहीं, बल्कि उनके मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एवं अन्य पार्टी नेता कल से ईडी की रेड में सांसद एनडी गुप्ता एवं केजरीवाल के सचिव समेत 12 ठिकानों पर कुछ नहीं मिलने का दावा कर रहे है, मगर यह आम आदमी पार्टी का एक बना बनाया ढोल है जिसे बजा कर आप नेता समझते है कि वह दोषमुक्त हो गए हैं। वह सत्येन्द्र जैन, मनीष सिसोदिया एवं संजय सिंह के यहां पड़े छापों के बाद भी कहते थे कि उनके पास कुछ नहीं मिला, जबकि दो साल से सत्येन्द्र जैन को नियमित जमानत नहीं मिल रही, वहीं सिसोदिया एवं संजय सिंह भी लम्बे समय से जमानत की बांट जोह रहे हैं।
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