ईपिक कंटेंट वेरीफिकेशन फॉर्म (ईसीवीएफ) मतदाता सूची में गलतियों
की समस्या को खत्म करेगा। यही नहीं बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) आवेदनों का जांच
करने के लिए घर जाते है या नहीं यह भी इस फॉर्म से पता चल जाएगा। इससे
सूची में फर्जी तरीके से मतदाता बनने वालों पर भी अंकुश लगेगा।
इसका प्रयोग
कितना सफल रहा यह अगले साल पांच जनवरी को आने वाली फाइनल मतदाता सूची के
आने पर पता चलेगा। दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने पहली बार 15
अक्तूबर से 10 नवंबर के स्पेशल समरी रिवजन के दौरान इस फॉर्म का प्रयोग
किया है।
क्या है ईसीवी फॉर्म ईपिक
कंटेंट वेरीफिकेशन फॉर्म कंप्यूटर से निकाला गया एक तरह का प्रतिपुष्टि
(एक्नॉलेजमेंट) फॉर्म है। यह उस समय निकलता है जब कोई आवेदक मतदाता सूची
में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन करता है।
आवेदन
फॉर्म में दी गई जानकारी को जब चुनाव कार्यालय कंप्यूटर में फीड करता है
तो उस समय यह फॉर्म जनरेट होता है। इसमें आवेदक की ओर से उपलब्ध कराई र्गई
जानकारी होती है। जिसमें नाम, पता, उम्र, पिता या पति का नाम समेत अन्य सभी
जरूरी सूचनाएं होती है।
ऐसे होता है प्रयोग जब
बीएलओ डोर टू डोर वेरीफिकेशन के लिए जाता है तो उसे आवेदन फॉर्म के साथ
ईसीवी फॉर्म पर में उपलब्ध जानकारी को आवेदक से चेक कराना पड़ेगा। आवेदक
उसी समय अगर कोई गलत जानकारी होती है तो उसे वहीं आवेदक से क्रास चेक करके
सुधरवा सकता है। जांच के बाद बीएलओ को ईसीवी फॉर्म पर सिग्नेचर करवाना होता
है।
इसके फायदे पहले
बीएलओ सिर्फ आवेदक की ओर से जमा कराए आवेदन फॉर्म को लेकर जाता था, लेकिन
साइन जरूरी नहीं थे। वह जांच के लिए घर गया या नहीं यह पता करना मुश्किल
था। यही नहीं अगर किसी आवेदक ने गलत सूचना दे दी है या कंप्यूटर में फीड हो
गई है तो उसका पता भी मतदाता पहचान पत्र बनने के बाद चलता था। मगर अब ऐसा
नहीं होगा। अब बीएलओ को घर जाना ही होगा क्योंकि उसे आवेदक के साइन लेने
होंगे।
फैक्ट फाइलकुल मतदाता 1.29 करोड़पुरुष 71.10 लाखमहिला 57.91 लाखथर्ड जेंडर 904