निर्वाचन आयोग ने भले ही लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों को राहत देते हुए चुनाव खर्च की सीमा 70 लाख रुपये कर दी है, लेकिन पहरा और कड़ा कर दिया है।
अगर प्रत्याशी यह समझ रहे हैं कि उनके किसी खर्च को चुनाव आयोग की नजर से बचाया जा सकता है, तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल होगी। क्योंकि चुनाव आयोग जिला निर्वाचन कार्यालय के सहयोग से प्रत्येक प्रत्याशी की गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए है।
जिला निर्वाचन अधिकारी विजय सिंह दहिया के मुताबिक प्रत्याशियों के खर्च पर नजर रखने के लिए 40 टीमों का गठन किया गया है। जिनका काम यह है कि वह दिन भर विधानसभाओं में भ्रमण कर यह पता लगाए कि किस प्रत्याशी ने किस जगह पर लगभग कितना पैसा खर्च किया है। किसके कितने बैनर, पोस्टर, होर्डिंग लगे हुए हैं। उसका कितना साइज है। इस साइज पर कितने रुपये का खर्च बाजार में आ रहा है।
सभा या रैली के पांडाल में कितनी कुर्सियों की व्यवस्था है। साथ ही आयोजन के समय कौन-कौन सी सुविधा मतदाताओं को लुभाने की लिए दी गई है। इसका पूरा ब्योरा लाकर निर्वाचन कार्यालय में रखे शैडो रजिस्टर में दर्ज करना है। इसी के आधार पर प्रत्याशियों को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की जाएगी। प्रत्याशियों द्वारा सौंपे गए खर्च विवरण को इसी रजिस्टर से क्रॉस चेक किया जाएगा।