हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद कई अरविंद केजरीवाल और मायावती समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए थे। बुधवार को चुनाव आयोग ने साइंटिस्टों, टेक्नोलॉजिस्टों और राजनीतिक पार्टियों को खुली चुनौती दी है कि वे मई के पहले हफ्ते में 10 दिन के अंदर ईवीएम हैक करके दिखाए।
EC planning an open challenge for scientists, technologist & political parties in first week of May to prove temperability of EVMs. pic.twitter.com/6GWySRuRfa
— ANI (@ANI_news) April 12, 2017
दिल्ली में नगर निगम के चुनाव के लिए 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। अरविंद केजरीवाल ने ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर राज्य चुनाव आयोग को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने तीन मांगें रखी। पहली मांग के रूप में केजरीवाल ने कहा कि एमसीडी चुनावों में वोटिंग के लिए राजस्थान से लाई गई ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जाए, क्योंकि वो टैंपर्ड हैं।
केजरीवाल ने दूसरी मांग रखी है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर की पार्टियों को कुछ ईवीएम की जांच करने का मौका मिले। इसके अलावा एमसीडी चुनाव सिर्फ वीवीपीएटी मशीनों से करवाए जाने की मांग की गई है।
दिल्ली में दूसरी पीढ़ी की ईवीएम मशीनों की संख्या पर्याप्त
चुनाव आयोग
केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में दूसरी पीढ़ी की ईवीएम मशीनें पर्याप्त संख्या में हैं, जो वीवीपीएटी तकनीक को सपोर्ट करती हैं।
उन्होंने इससे पहले आरोप लगाया है कि राजस्थान के धौलपुर में बीते रविवार को हुए उप-चुनाव के दौरान 18 ईवीएम मशीनें ऐसी पाई गईं जिनमें किसी भी अन्य दल के लिए निर्धारित बटन दबाने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ही वोट गया।
केजरीवाल ने कहा, 'हमारी मांग है कि राजस्थान से मंगवाई गई सभी ईवीएम मशीनें तत्काल वापल ली जाएं।' केजरीवाल ने आरोप लगाया कि बटन कोई भी दबाओ लेकिन वोट बीजेपी को ही जा रहा है, उन्होंने कहा कि ईवीएम का सॉफ्टवेयर, प्रोगामिंग, कोड बदला गया है।
केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग अभी भी जांच के लिये तैयार नहीं है, कहीं इन सब में चुनाव आयोग भी नहीं तो मिला हुआ. उन्होंने कहा कि हमने आयोग से इस बारे में शिकायत की थी, लेकिन समाधान नहीं निकला।