गेहूं के इस्तेमाल से बढ़ीं समस्याएं
एम्स के पूर्व प्रोफेसर डॉ. चंद्रकांत एस. पांडव ने कहा कि हजारों साल से भारतीय लोग मोटा अनाज खा रहे थे। ब्रिटिश काल में दैनिक भोजन में गेहूं को शामिल करने से आंत में सूजन की समस्या बढ़ी। इसके कारण शरीर में कई रोगों ने जन्म लिया। इसमें मधुमेह, मानसिक रोग सहित दूसरे विकार शामिल हैं। यदि हम दैनिक खाने में मोटा अनाज शामिल करते हैं तो खाने का पोषक फिर से शरीर को मिलेगा। यह प्राकृतिक भोजन है। इससे शरीर को कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटिन सहित दूसरे तत्व आसानी से मिलते हैं। शरीर और मस्तिष्क को बैलेंस न्यूट्रिशन मिलने से विकास होता है।
जठरांत्र के अच्छे बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद
सूजन का समाधान विषय पर दिल्ली में मोटे अनाज को लेकर हुए कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि मोटा अनाज हमारे जठरांत्र (आंत का हिस्सा) के अच्छे बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद है। बैक्टीरिया जठरांत्र के अलावा त्वचा और नाक में भी रहते हैं। हमारा शरीर इन बैक्टीरिया को खाना और पनाह देता है। इन बैक्टीरिया की मदद से उन फाइबर को डाइजेस्ट कर पाते हैं जिनके लिए शरीर सक्षम नहीं है। इसके अलावा ये बैक्टीरिया शरीर में ऐसे एंजाइम को तैयार करते हैं जिनकी मदद से शरीर को विटामिन मिलते हैं।
इसमें बी 1, बी 12, बी फोलिक एसिड सहित अन्य शामिल हैं। यदि शरीर में अच्छे बैक्टीरिया की हानि होती है तो शरीर में कुपोषण के साथ, मोटाबॉलिक डिसऑर्डर, मानसिक रोग सहित जीवन शैली से जुड़े दूसरे रोग हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटा अनाज शरीर को ऐसे पोषक तत्व देता है जो हमारे अच्छे बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद हैं।