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एक दशक तक फाइलों में घूमता रहा एक्सप्रेसवे, 10 साल पर भारी पड़े 500 दिन

Mon, 28 May 2018 05:30 PM IST
योगेश शर्मा, अमर उजाला, नोएडा
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eastern peripheral expressway - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-एनसीआर को रफ्तार देने वाली ईस्टर्न पेरिफेरल हाइवे परियोजना का तोहफा आखिरकार जनता को मिल ही गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सपना एक दशक से दिखाया जा रहा था। कभी जमीन की अड़चन बाधा बनीं तो केंद्र व राज्यों की सरकारों के बीच खींचतान ने भी इस परियोजना की राह में रोड़ा बनने का काम किया।

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10 साल तक जो परियोजना सरकारी फाइलों में इधर से उधर घूमती रही, केंद्र की मोदी सरकार उसे 500 दिन में पूरा करने का दावा कर अपनी पीठ थपथपायी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए साल 2005-06 में एक तरफ कुंडली से मानेसर होते हुए पलवल तक (केएमपी) तो दूसरी तरफ कुंडली से गाजियाबाद होते हुए पलवल तक (केजीपी) रिंगनुमा हाइवे बनाने की योजना तैयार की थी।

135 किलोमीटर लंबे केएमपी यानी वेस्टर्न पेरिफेरल हाईवे का पलवल से मानेसर तक 53 किलोमीटर लंबा हिस्सा अप्रैल 2016 में ही जनता को समर्पित किया जा चुका है। दो राज्यों के बीच फंसे केजीपी यानी ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का सपना साकार करना बड़ी चुनौती था।
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इस परियोजना की बड़ी बाधा केंद्र और राज्यों की सरकारों के बीच बेहतर तालमेल न होना भी माना गया, क्योंकि जब योजना बनी तब केंद्र में यूपीए, हरियाणा में कांग्रेस और उत्तर प्रदेश में सपा बाद में बसपा फिर सपा की सरकार बनी।

Eastern Peripheral Expressway - फोटो : ravi batra
लंबे समय तक योजना सुस्ती का शिकार बनी रही। 2014 में केंद्र और हरियाणा में भाजपा सरकार बनने के बाद परियोजना पर तेजी से काम शुरू हुआ। नवंबर 2015 में ईस्टर्न पेरिफेरल परियोजना की आधारशिला रखी गई और 500 दिन में इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।

2017 में उत्तर प्रदेश में भी भाजपा ने सत्ता की कमान संभाल ली। इस प्रोजेक्ट को मिशन 2019 को ध्यान में रखते हुए एनसीआर के ड्रीम प्रोजेक्ट की श्रेणी में शामिल किया गया। पलवल से कुंडली (सोनीपत) तक 135 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का 47.55 किलोमीटर लंबा हिस्सा हरियाणा में और 87.45 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश की सरहद में आता है।

देरी की वजह से तिगुना हुआ बजट:-
शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को बीओटी (बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर) फॉर्मूले के आधार पर बनाने की तैयारी थी, लेकिन प्राइवेट कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई। प्रोजेक्ट में लगातार देरी से एक दशक में इसकी अनुमानित लागत तीन गुना तक बढ़ गई।

शुरुआत में प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 3700 करोड़ आंकी गई थी जो अब 11 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। केंद्र की नई सरकार ने इस प्रोजेक्ट में रुचि दिखाते हुए खर्च खुद वहन करने का फैसला लिया था। करीब 5900 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण पर खर्च किया गया है।
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एनसीआर को मिलेगी ‘ऑक्सीजन’

eastern peripheral expressway - फोटो : अमर उजाला
इस हाइवे के बनने से दिल्ली में ट्रैफिक का बोझ 41 फीसदी तक कम होगा। इसके साथ ही प्रदूषण के स्तर में 47 फीसदी तक कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। फरीदाबाद-पलवल से गुजरने वाले दिल्ली-आगरा नेशनल हाइवे और गाजियाबाद से गुजरने वाले एनएच-24 को जाम से बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि 45 हजार कारों का बोझ और 25 हजार ट्रकों के लिए ईस्टर्न पेरिफेरल हाइवे का विकल्प होगा। औद्योगिक विकास के लिए ईस्टर्न पेरीफेरल की खासी जरूरत समझी जा रही थी।

कहां कितनी लंबाई:-
 
जिला        गांवों की संख्या      अनुमानित लंबाई
पलवल (हरियाणा)          15         18.76 किलोमीटर
फरीदाबाद (हरियाणा)     09         16.75 किलोमीटर 
गौतमबुद्ध नगर (यूपी)     39         41.61 किलोमीटर
गाजियाबाद (यूपी)        16         24.67 किलोमीटर
बागपत (यूपी)         11         20.16 किलोमीटर
सोनीपत (हरियाणा)          08         13.04 किलोमीटर
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