सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता ने कहा जिस रिपोर्ट में डीएनए का मिलान नहीं हुआ था वह एक महिला अधिकारी ने तैयार की थी। इससे पहले भी एक अन्य मामले में गलत रिपोर्ट तैयार कर चुकी हैं। दोबारा जांच में आरोपी का डीएनए पीड़िता के शरीर से मिले डीएनए से मैच कर गया था।
जानकारी के मुताबिक, महिला अधिकारी की नियुक्ति पर जांच चल रही है। इसके अलावा चार अन्य अधिकारियों पर जांच जारी है। दिल्ली सरकार ने भी जांच का निर्देश अप्रैल 2018 में दिया था।
बावजूद सभी अधिकारी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। अधिकारी मामला कोर्ट में विचाराधीन होने का तर्क दे रहे हैं। वहीं, चैक गायब करने के आरोप में एक सहायक निदेशक पर एफआईआर भी दर्ज है।
एफएसएल में फोरेंसिक अधिकारियों की नियुक्तियों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। निशा ठाकुर ने 2015 में उक्त महिला अधिकारी की योग्यता पर सवाल उठाया था। उस समय फैक्ट फाइडिंग कमेटी ने जांच की थी।
मणिपुर एफएसएल निदेशक ने पांच दिसंबर 2015 को दिल्ली एफएसएल को पत्र लिखकर बताया था कि उक्त महिला अधिकारी की योग्यता व अनुभव की रिपोर्ट की जांच चल रही है, लेकिन कमेटी ने इसका जिक्र नहीं किया था।
इसके बाद हाईकोर्ट ने महिला अधिकारी की योग्यता संबंधी जांच 12 सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया था। इससे पहले मोनिका चक्रवर्ती ने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए 2011 में संघ लोक सेवा आयोग के खिलाफ याचिका दायर की थी।
पांच लैब बनने की योजना अधर में
हाईकोर्ट ने एफएसएल से आने वाली रिपोर्ट पर देरी का संज्ञान लेते हुए नए लैब खोलने का निर्देश दिया था। दिल्ली सरकार ने निर्भया गैंग रेप के बाद राजधानी में पांच नए लैब खोलने का ऐलान किया था। चाणक्यपुरी स्थित अकबर भवन में पहला लैब खोला गया था लेकिन अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है। हाईकोर्ट की अधिवक्ता मीरा भाटिया ने बताया कि सरकारी लैब पर काम का बोझ कम करने के लिए मोबाइल व निजी लैब को मान्यता देने का सुझाव दिया था लेकिन यह योजना भी ठंडे बस्ते में पड़ी है।